संसद के मानसून सत्र में हंगामे और विधेयकों की चर्चा
संसद का पहला हफ्ता हंगामे में बीता
मानसून सत्र का आरंभ विपक्ष के हंगामे के साथ हुआ। इस दौरान जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का आंदोलन चल रहा था, जिसमें आंदोलनकारियों ने पहले दिन संसद की ओर मार्च किया, जिससे काफी हलचल मची। पिछले कुछ वर्षों से सरकार यह मानती आई है कि पहले हफ्ते में कोई महत्वपूर्ण कार्य नहीं होगा, इसलिए विपक्ष को हंगामा करने की अनुमति दी जाती है। सरकार की ओर से संसद के सुचारू संचालन का कोई प्रयास नहीं किया गया।
दूसरे हफ्ते में, केवल पेपर लीक बिल पर चर्चा हुई, जिसमें लोकसभा में दो दिन और राज्यसभा में एक दिन का समय दिया गया। इसके अलावा, अन्य समय हंगामा ही चलता रहा। सरकार ने वंदे मातरम् को राष्ट्रगान के समान प्रोटोकॉल दिलाने वाला बिल भी पास किया, लेकिन यह बिना किसी विशेष चर्चा के ही पारित हुआ। अब सवाल यह है कि सोमवार से शुरू हो रहे तीसरे हफ्ते में क्या स्थिति होगी?
सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव
सत्तापक्ष ने राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी किया है, जबकि विपक्ष ने केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के खिलाफ ऐसा ही नोटिस दिया है। अयोध्या के राममंदिर में चढ़ावे की चोरी को लेकर विपक्ष द्वारा संसद में नुक्कड़ नाटक किया गया, जिसके चलते राहुल गांधी और पप्पू यादव जैसे नेताओं पर विभिन्न स्थानों पर मुकदमे दर्ज हो रहे हैं। यह स्पष्ट है कि पेपर लीक और चढ़ावे की चोरी पर हंगामा जारी रहेगा।
हालांकि, असली सवाल यह है कि क्या सरकार नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन का बिल और परिसीमन का बिल पेश करेगी, या इसे अंतिम हफ्ते तक टाल देगी?
अंतिम हफ्ते की तैयारी
मानसून सत्र का अंतिम हफ्ता सोमवार, 10 अगस्त से शुरू होगा और यह 13 अगस्त तक चलेगा। पिछली बार सरकार ने तीन दिन का विशेष सत्र बुलाकर नारी शक्ति वंदन कानून में संशोधन का प्रयास किया था। इस बार भी अंतिम चार दिनों में ऐसा प्रयास संभव है। प्रधानमंत्री 15 अगस्त को लाल किले से इस पर विस्तार से चर्चा कर सकते हैं।
लेकिन इससे पहले एफसीआरए बिल को लेकर संसद में हंगामा होने की संभावना है। सरकार एफसीआरए कानून में बदलाव पर अड़ी हुई है, जिसमें सबसे बड़ा विवाद यह है कि यदि एफसीआरए लाइसेंस निरस्त हो जाता है या नवीनीकरण नहीं होता है, तो विदेशी चंदे से बने संपत्तियों को सरकार जब्त कर लेगी। देश की कई गैर सरकारी संस्थाएं इसका विरोध कर रही हैं।