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संसद में गतिरोध: संजय राउत ने अमित शाह को दी चुनौती

संसद में गतिरोध जारी है, जिसमें संजय राउत ने अमित शाह को चुनौती दी है कि उन्हें इस्तीफा देना पड़ सकता है। बीजेपी ने विपक्ष पर आरोप लगाया है कि वे चर्चा से बच रहे हैं। जानें इस राजनीतिक विवाद के पीछे की कहानी और दोनों पक्षों के तर्क।
 

संसद में जारी गतिरोध

संसद में अभी भी गतिरोध बना हुआ है। मौजूदा सत्र समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, लेकिन इस दौरान केवल कुछ ही दिन ऐसे रहे हैं जब कार्यवाही सुचारू रूप से चल पाई हो। विपक्ष लगातार केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मांग कर रहा है कि वे राम मंदिर चढ़ावे की चोरी और जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने के मुद्दों पर स्पष्टीकरण दें। इसी संदर्भ में शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने एक दिलचस्प प्रतिक्रिया दी। बुधवार को पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में अमित शाह ने कहा कि भविष्य में ऐसा समय आएगा जब उन्हें इस्तीफा देना पड़ सकता है।


बीजेपी का विपक्ष पर हमला

इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने विपक्ष पर हमला तेज कर दिया है। बीजेपी का कहना है कि अमित शाह जवाब देने के लिए तैयार हैं, लेकिन राहुल गांधी को भी सुनना होगा। दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। विपक्ष का आरोप है कि पीएम नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह सवालों से भाग रहे हैं, इसलिए वे संसद में उपस्थित नहीं होते। वहीं, बीजेपी का कहना है कि विपक्ष जानबूझकर हंगामा कर रहा है ताकि चर्चा से बच सके।


संजय राउत का बयान

संजय राउत ने कहा, 'अमित शाह का बयान क्या है, उन्हें तो इस्तीफा देना पड़ेगा। भविष्य में यह स्थिति आएगी कि उन्हें इस्तीफा देना होगा। देखिए, क्या होता है, यह इतना आसान नहीं है।' उन्होंने आगे कहा, 'दो महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। पहला, राम मंदिर का चढ़ावा चोरी होना। दूसरा, जंतर-मंतर पर बच्चों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया? इन दोनों मुद्दों पर सदन में पिछले 15 दिनों से हंगामा हो रहा है। एक मुद्दे को छोड़ेंगे, दूसरे पर चर्चा करेंगे। दोनों पर चर्चा होनी चाहिए।'


चुनौती का सामना

संजय राउत ने गृहमंत्री अमित शाह को चुनौती देते हुए कहा, 'वे खुद को सरदार पटेल जैसा लौह पुरुष मानते हैं, तो उन्हें डरना नहीं चाहिए। क्या हम डरते हैं? नहीं, हम आपसे नहीं डरते। हमें जेल में डालने की कोशिश की जाती है, हमारे खिलाफ कार्रवाई होती है। हम आपसे नहीं डरते और न ही डरेंगे। अब डरने की बारी आपकी है।'


संसद का हाल

इस सत्र में 15 दिन से अधिक समय हो गया है, लेकिन केवल कुछ ही दिन ऐसे रहे हैं जब संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चल पाई। लगभग हर दिन दोनों सदनों की कार्यवाही बाधित हुई है और कई विधेयक बिना चर्चा के ही पारित हो गए हैं।