संसद में परिसीमन विधेयकों पर हंगामा, डीएमके का विरोध जारी
संसद के विशेष सत्र में हंगामा
गुरुवार को संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र के पहले दिन परिसीमन से संबंधित विधेयकों पर चर्चा शुरू होते ही सदन में भारी हंगामा मच गया। विपक्षी दलों ने इन विधेयकों को संविधान के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध किया। विशेष रूप से द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने इन बिलों का तीव्र विरोध किया।
विपक्ष का तीखा विरोध
डीएमके सांसद टीआर बालू ने इन विधेयकों को 'सैंडविच बिल' करार देते हुए सदन में आपत्ति जताई। जैसे ही विधेयक सदन में प्रस्तुत किए गए, विपक्षी सदस्यों ने एक के बाद एक आपत्तियां उठानी शुरू कर दीं।
स्पीकर ओम बिरला का जवाब
डीएमके के वरिष्ठ सांसद टीआर बालू ने कहा कि ये तीनों विधेयक आपस में जुड़े हुए हैं और इन्हें सैंडविच बिल कहा जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इनका विरोध करती है और काले झंडे दिखाए हैं। इस पर स्पीकर ओम बिरला ने तीखा जवाब देते हुए कहा कि काले या पीले झंडे दिखाने से सदन पर कोई असर नहीं पड़ता। सदन में चर्चा जारी है और विपक्ष इन विधेयकों के खिलाफ अपनी आवाज उठाता रहा है। डीएमके सदस्यों ने काले कपड़े पहनकर भी अपना विरोध दर्ज कराया।
स्टालिन का विरोध प्रदर्शन
डीएमके पहले से ही परिसीमन विधेयक के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है। संसद सत्र शुरू होने से पहले ही पार्टी ने राज्य स्तर पर विरोध का आह्वान किया था। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने गुरुवार को नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान विधेयक की एक प्रति जलाई और काला झंडा लहराया। स्टालिन ने इसे फासीवादी कदम बताते हुए चेतावनी दी कि तमिलनाडु इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन पूरे द्रविड़ क्षेत्र में फैलेगा।
महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा
स्टालिन ने विधेयक की प्रति जलाते हुए भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि मैं इस विधेयक की प्रति जलाकर एक और आग लगा रहा हूं जो तमिलों को उनके ही देश में शरणार्थी बना देगी। विपक्षी दलों का कहना है कि महिला आरक्षण कानून से जुड़े इन संशोधनों के साथ परिसीमन का मुद्दा दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकता है। डीएमके और अन्य विपक्षी दल दक्षिणी राज्यों की जनसंख्या नियंत्रण नीतियों के बावजूद सीटों में कमी का खतरा बता रहे हैं।