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संसद में पेश होंगे महत्वपूर्ण विधेयक, व्यापार को सरल बनाने की योजना

सरकार सोमवार को संसद में कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है, जिसमें कॉर्पोरेट कानूनों में संशोधन और ट्रांसजेंडर अधिकारों से संबंधित विधेयक शामिल हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण व्यापार को सरल बनाने के लिए नए बदलावों का प्रस्ताव रखेंगी, जबकि ट्रांसजेंडर विधेयक को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। जानें इन विधेयकों पर संसद में क्या चर्चा होगी और क्या बदलाव संभव हैं।
 

सरकार का बड़ा विधायी एजेंडा

नई दिल्ली। सोमवार को सरकार संसद में कई महत्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव लेकर आ रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कॉर्पोरेट कानूनों में संशोधन से संबंधित एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश करेंगी, जिसका उद्देश्य देश में व्यापार को सुगम बनाना है। इस विधेयक के माध्यम से कंपनी अधिनियम और सीमित देयता भागीदारी अधिनियम 2008 में संशोधन किया जाएगा। सरकार कई आपराधिक प्रावधानों को समाप्त कर उन्हें जुर्माने में बदलने की योजना बना रही है, जिससे कंपनियों, स्टार्टअप्स और छोटे उद्योगों पर कानूनी बोझ कम होगा। इस बिल को कैबिनेट ने पहले ही 10 मार्च को मंजूरी दे दी थी। उल्लेखनीय है कि कंपनी अधिनियम में 2015 से अब तक चार बार संशोधन हो चुका है, जबकि LLP अधिनियम में अंतिम बदलाव 2021 में किया गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार का ध्यान डीक्रिमिनलाइजेशन और स्टार्टअप्स को राहत देने पर है।


अन्य विधेयक और विवाद

इसके अलावा, अमित शाह राज्यसभा में “केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक 2026” पेश कर सकते हैं। इस विधेयक का उद्देश्य CAPF में ग्रुप A अधिकारियों की भर्ती और सेवा नियमों में बदलाव करना है। वहीं, ट्रांसजेंडर संशोधन विधेयक को लेकर विवाद बढ़ गया है। विपक्षी नेताओं और ट्रांसजेंडर अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस विधेयक को वापस लेने की मांग की है। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित जन सुनवाई में लोगों ने चिंता व्यक्त की है कि प्रस्तावित बदलाव से ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकार कमजोर हो सकते हैं।


इससे पहले वीरेंद्र कुमार ने 13 मार्च को लोकसभा में “ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक 2026” पेश किया था। इस विधेयक में “ट्रांसजेंडर” की नई परिभाषा निर्धारित करने का प्रस्ताव है, जिसमें कुछ यौन अभिरूचि और स्व-निर्धारित लैंगिक पहचान को दायरे से बाहर रखने की बात कही गई है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि संसद में इन विधेयकों पर क्या चर्चा होती है और क्या बदलाव सामने आते हैं।