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संसदीय समिति ने रक्षा मंत्रालय को खराब गोला-बारूद खरीद पर फटकारा

संसदीय लोक लेखा समिति ने रक्षा मंत्रालय को खराब गोला-बारूद की खरीद के लिए कड़ी फटकार लगाई है, जिससे सरकार को 62.10 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। समिति ने आर्टिलरी गनों की खरीद में हो रही देरी और धनुष प्रोजेक्ट पर भी चिंता जताई है। रिपोर्ट में समय पर खरीद सुनिश्चित करने और सप्लाई चेन को मजबूत करने की सिफारिश की गई है। जानें पूरी रिपोर्ट में और क्या कहा गया है।
 

खराब गोला-बारूद की खरीद पर कड़ी आलोचना

संसदीय लोक लेखा समिति (PAC) ने रक्षा मंत्रालय को खराब गुणवत्ता वाले गोला-बारूद की खरीद के लिए गंभीर चेतावनी दी है। मानसून सत्र के दौरान, समिति ने लोकसभा में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस खराब गोला-बारूद की खरीद से सरकार को 62.10 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।


यह जानकारी मिली है कि यह गोला-बारूद बडमाल ऑर्डनेंस फैक्ट्री से प्राप्त किया गया था। सरकार को इस खराब माल के प्रतिस्थापन में यह वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है। लोक लेखा समिति ने आर्टिलरी गनों की खरीद में हो रही लंबी देरी पर चिंता व्यक्त की है, जिससे सेना की ऑपरेशनल तत्परता प्रभावित हो रही है।


समिति ने कहा कि ऑर्डनेंस फैक्ट्री की यह कमी न केवल धन की बर्बादी का कारण है, बल्कि यह सेना के गोला-बारूद के स्टॉक की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाती है। रिपोर्ट में रक्षा मंत्रालय से सप्लाई चेन को मजबूत करने, सख्त मानक संचालन प्रक्रियाओं को लागू करने और समयसीमा का पालन करने की मांग की गई है।


रिपोर्ट में तोपों की खरीद में हो रही देरी पर भी चिंता जताई गई है। समिति ने कहा कि सेना के पास तोपों की भारी कमी है, और उन्हें पुरानी तथा कम मारक क्षमता वाली तोपों का उपयोग करना पड़ रहा है। समिति ने समय पर खरीद सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।


संसदीय लोक लेखा समिति की सिफारिशें

सिफारिशें



  • इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार

  • कौशल विकास

  • बेहतर निर्णय लेने की प्रक्रिया

  • समय पर उत्पादन


धनुष प्रोजेक्ट पर उठे सवाल

धनुष प्रोजेक्ट पर चिंता


मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सांसद केसी वेणुगोपाल और धर्मेंद्र यादव ने लोक लेखा समिति (PAC) द्वारा कई रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत की। समिति ने 155एमएम/45 कैलिबर धनुष गन तोप के उत्पादन में हो रही देरी पर भी चिंता व्यक्त की। समिति ने सिफारिश की कि ऐसे प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले बुनियादी ढांचे और घरेलू क्षमता की जांच की जानी चाहिए, ताकि लागत में वृद्धि और देरी को रोका जा सके।