सद्गुरु ने नेपाल के लिए 1 करोड़ का योगदान देने का किया वादा, हिमालयी सहयोग की अपील
नेपाल-तिब्बत सीमा पर बाढ़ की त्रासदी
काठमांडू - नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई भयानक बाढ़ के संदर्भ में सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने रविवार को काठमांडू में आयोजित 'नेपाल के साथ एकजुटता' कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री को आपदा राहत कोष में 1 करोड़ रुपये का योगदान देने का आश्वासन दिया। इसके साथ ही, उन्होंने हिमालयी देशों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस आपदा में हजारों लोग लापता हैं और कई लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है। लापता व्यक्तियों में 'ईशा सेक्रेड वॉक्स कैलाश यात्रा' के 77 लोग शामिल हैं, जो आपदा के समय चीन के गियिरोंग इमिग्रेशन सेंटर पर थे, साथ ही नेपाल में तैनात तीन ईशा स्वयंसेवक भी लापता हैं। सद्गुरु ने भारत, चीन, पाकिस्तान, नेपाल और भूटान को मिलाकर एक हिमालयन बोर्ड बनाने का प्रस्ताव रखा और इन देशों से अपील की कि वे राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठकर साझा पर्वतीय तंत्र के लिए सोचें।
सद्गुरु ने कहा, "पहाड़ों को आपकी राजनीतिक संबद्धता का पता नहीं होता। हमें एक इकाई के रूप में काम करने की आवश्यकता है। हिमालय इस ग्रह की सबसे अद्भुत विशेषता है, लेकिन यह बहुत नाजुक भी है।" उन्होंने यह भी कहा कि सभी हिमालयी देशों को एक संस्था का गठन करना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्वतमालाओं को संरक्षित किया जा सके।
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हम इसे केवल नेपाल की समस्या मानते हैं, तो इसका कोई समाधान नहीं निकलेगा। सद्गुरु ने कहा, "किसी को उम्मीद नहीं थी कि ऐसा कुछ होगा कि ग्लेशियर का एक बड़ा टुकड़ा पहाड़ की चोटी से गिर जाएगा। अब जब यह हो गया है, तो हमें इस पर ध्यान देना होगा।"
कार्यक्रम में अभिनेत्री मनीषा कोइराला ने सद्गुरु से पूछा कि लोग ऐसी आपदाओं से क्या सीख सकते हैं। इस पर सद्गुरु ने कहा, "हमें आपदाओं का इंतजार नहीं करना चाहिए। हमें यह समझना चाहिए कि हम नश्वर हैं। अगर हम इस बात के प्रति जागरूक रहें, तो हम अपनी जिंदगी को बेहतर तरीके से जी सकेंगे।"
उन्होंने लोगों से कहा कि वे इस आपदा को 'दैवीय कारण' या 'रहस्यमयी संभावना' न मानें, क्योंकि इससे इंसानी दुख की वास्तविकता कम हो सकती है। सद्गुरु ने कहा, "भौतिक घटनाएं भौतिक नियमों से चलती हैं। हमें इन घटनाओं को समझने की आवश्यकता है।"
सद्गुरु ने यह भी घोषणा की कि कोयंबटूर के ईशा योग केंद्र में 'काल भैरव कर्म' किया जाएगा, जो प्राकृतिक और अप्राकृतिक मौतों में मरने वालों को शांति और सुखद बदलाव दिलाने के लिए किया जाता है। 'इन सॉलिडैरिटी विद नेपाल' कार्यक्रम ने काठमांडू में लोगों को आपदा से प्रभावित लोगों के समर्थन में एकजुट किया।