सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई जारी
सुप्रीम कोर्ट में सबरीमाला मंदिर का मामला
नई दिल्ली। सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर बुधवार को सुनवाई का 10वां दिन था। इस दिन वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने यह सवाल उठाया कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय लागू होने के बावजूद महिलाओं को मंदिर में प्रवेश क्यों नहीं दिया जा रहा है। इंदिरा जयसिंह की दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सामाजिक सुधार के नाम पर धार्मिक आस्था को कमजोर नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि आस्था और विवेक के मुद्दों पर कोर्ट में बहस नहीं हो सकती।
इंदिरा जयसिंह ने पहले कहा था कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का निर्णय अब भी प्रभावी है और इस पर कोई रोक नहीं है, फिर भी महिलाओं को मंदिर में प्रवेश नहीं मिल रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले की समीक्षा याचिका पर सुनवाई कर रहा है। हालांकि, अदालत ने कभी यह तय नहीं किया कि धर्म में क्या आवश्यक है और क्या नहीं, यह निर्णय धर्म को ही करना है। इस पर जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कहा कि अदालत को इस भूमि की सभ्यता और धार्मिक इतिहास को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि इसी संदर्भ में संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का निर्माण हुआ है।