समुद्री रास्तों से बढ़ता आतंकवाद: लश्कर-ए-तैयबा की नई रणनीति
नई खतरे की पहचान
नई दिल्ली: रात की शांति, समुद्र की लहरों की हल्की आवाज और गहराइयों में छिपा एक नया खतरा। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, आतंकवाद के तरीके में बदलाव आ रहा है, और अब खतरा सीमाओं से नहीं, बल्कि समुद्र के रास्ते उत्पन्न होने की संभावना है। जिस प्रकार हमास ने गाजा की सुरंगों और समुद्र के माध्यम से इजरायल पर हमले किए हैं, उसी तर्ज पर लश्कर-ए-तैयबा भारत को निशाना बनाने की योजना बना रहा है।
लश्कर की नई समुद्री ताकत
लश्कर के नेता सैफुल्लाह ने हाल ही में कहा है कि संगठन की नई "वॉटर फोर्स" समुद्री रास्ते से भारत में घुसपैठ करने की तैयारी कर रही है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, यह केवल एक बयान नहीं है। पाकिस्तान में गुप्त प्रशिक्षण केंद्रों पर सैकड़ों आतंकियों को पानी के भीतर हमले की विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है। गणतंत्र दिवस जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय आयोजनों के बीच यह चेतावनी सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
हमास से प्रेरित रणनीति
हमास मॉडल से प्रेरित लश्कर की नई रणनीति
लश्कर-ए-तैयबा की वर्तमान रणनीति हमास की 'नुखबा फोर्स' से मिलती-जुलती बताई जा रही है। हमास ने इजरायल के खिलाफ समुद्र के रास्ते अंडरवॉटर डाइवर्स का उपयोग किया था। अब लश्कर भी इसी रास्ते को अपनाने की कोशिश कर रहा है। पहले जहां आतंकवादी कंटीले तारों और सीमाओं को पार करने का प्रयास करते थे, अब उनका ध्यान समुद्री मार्गों पर है।
रडार से बचने की तकनीक
रडार से बचने की तकनीक
इस नई 'वॉटर फोर्स' की सबसे खतरनाक बात यह है कि इन्हें रडार से बचने की ट्रेनिंग दी जा रही है। आतंकवादी अंडरवॉटर स्कूटर और लो-प्रोफाइल बोट्स का उपयोग कर सकते हैं, जो सामान्य निगरानी प्रणाली में आसानी से नजर नहीं आते। रिपोर्टों के अनुसार, ये आतंकवादी घंटों तक पानी के नीचे रहकर चुपचाप तटीय क्षेत्रों तक पहुंच सकते हैं।
मनोवैज्ञानिक दबाव
मनोवैज्ञानिक दबाव और 26/11 की याद
सैफुल्लाह का बयान केवल सैन्य तैयारी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे मनोवैज्ञानिक युद्ध के रूप में देखा जा रहा है। 26/11 मुंबई हमले की यादें अब भी ताजा हैं और समुद्र के रास्ते हमले की आशंका उन्हीं जख्मों को फिर से कुरेद रही है। इसी कारण मुंबई, गुजरात और केरल जैसे तटीय राज्यों में हाई अलर्ट घोषित किया गया है।
हमास से सबक
हमास की अंडरवॉटर फोर्स से क्या सबक
हमास की नौसैनिक शाखा विशेष रूप से प्रशिक्षित गोताखोरों का उपयोग करती रही है। ये आतंकवादी समुद्र के भीतर लंबी दूरी तय कर तटीय ठिकानों तक पहुंचते हैं और सुरक्षा चौकियों को निशाना बनाते हैं। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि लश्कर भी इसी तरह के आधुनिक उपकरणों तक पहुंच बना चुका है, जिनमें जीपीएस सिस्टम, अंडरवॉटर स्कूटर और साइलेंट इंजन वाली स्पीड बोट्स शामिल हैं।
भारत की तैयारी
भारत की तैयारी और जवाब
भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड ने संभावित खतरे को देखते हुए तटीय निगरानी को और मजबूत किया है। 'ऑपरेशन कोस्टल अलर्ट' के तहत रडार और सोनार सिस्टम को सुदृढ़ किया गया है। इसके साथ ही तटीय क्षेत्रों में मछुआरों को सतर्क किया गया है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंचे।
समुद्र की गहराइयों से उभरता यह नया खतरा भारत की सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। हालांकि, एजेंसियों का दावा है कि सतर्कता और मजबूत निगरानी के चलते किसी भी साजिश को नाकाम करने के लिए देश पूरी तरह तैयार है।