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सरकार 2029 लोकसभा चुनाव के लिए परिसीमन विधेयक लाने की योजना बना रही है

केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले एक नया परिसीमन विधेयक लाने की योजना बना रही है। इसके लिए क्षेत्रीय दलों के साथ राजनीतिक सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है। इस विधेयक से संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्निर्धारण का मार्ग प्रशस्त हो सकता है, जिससे राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व में बदलाव की संभावना है। जानें इस प्रक्रिया के पीछे की रणनीति और सरकार की योजना के बारे में।
 

राजनीतिक सहमति के लिए क्षेत्रीय दलों से बातचीत


विधेयक पर क्षेत्रीय दलों से राजनीतिक सहमति बनाने की कोशिश
केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले एक नया परिसीमन विधेयक लाने की योजना बना रही है। इसके लिए सरकार विभिन्न क्षेत्रीय दलों के साथ राजनीतिक सहमति स्थापित करने में जुटी है। जिन दलों से बातचीत की गई है उनमें डीएमके और तृणमूल कांग्रेस शामिल हैं, और अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ भी चर्चा जारी है।


परिसीमन प्रक्रिया का प्रभाव

केंद्र सरकार का यह निर्णय दशकों में पहली बार संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के बड़े पैमाने पर पुनर्निर्धारण का अवसर प्रदान कर सकता है, जिससे एक महत्वपूर्ण बहस फिर से शुरू हो सकती है, जिसने लंबे समय से भारत के राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित किया है।


राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व में बदलाव की संभावना

वर्तमान में लोकसभा सीटों का आवंटन 1971 की जनगणना के आंकड़ों पर आधारित है। हालांकि, लोकसभा में 543 निर्वाचित सदस्य हैं, लेकिन संवैधानिक परिसीमन समाप्त होने के बाद किसी भी परिसीमन प्रक्रिया से राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व में बदलाव की संभावना है।


केंद्र उन राज्यों की चिंताओं से अवगत है जिन्होंने जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित किया है और एक ऐसा फार्मूला तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है जिसे व्यापक राजनीतिक स्वीकृति मिल सके।


सहमति पर आधारित दृष्टिकोण की आवश्यकता

सरकार का मानना है कि परिसीमन को राजनीतिक रूप से विभाजनकारी मुद्दा बनने से रोकने के लिए आम सहमति पर आधारित दृष्टिकोण महत्वपूर्ण होगा। इसलिए चर्चाएं निष्पक्ष प्रतिनिधित्व के सिद्धांत को बनाए रखते हुए चिंताओं को दूर करने पर केंद्रित हैं।