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सरकार के अधिकारियों के सेवा विस्तार पर बढ़ती निर्भरता

सरकार द्वारा अधिकारियों के सेवा विस्तार की नीति पर बढ़ती निर्भरता ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में विदेश सचिव विक्रम मिस्री को एक साल का विस्तार दिया गया है, जिससे उनकी सेवा अवधि 2027 तक बढ़ गई है। इस नीति के कारण अन्य अधिकारियों के लिए अवसरों की कमी हो रही है, जिससे उनमें असंतोष उत्पन्न हो रहा है। जानें इस विषय पर और क्या हो रहा है और कैसे यह स्थिति सरकारी तंत्र को प्रभावित कर रही है।
 

सेवा विस्तार की नीति पर सवाल


जब भी सरकार किसी अधिकारी को सेवा विस्तार देती है, यह संकेत मिलता है कि उसके पास योग्य अधिकारियों की कमी है। इस स्थिति में, एक ही अधिकारी को लंबे समय तक बनाए रखना अन्य अधिकारियों के लिए अवसरों की कमी का कारण बनता है। यह माना जाता है कि सभी अधिकारी सरकार के हैं, लेकिन बार-बार सेवा विस्तार देने से अन्य अधिकारियों के साथ अन्याय होता है, जिससे वे अपने विभाग में उच्चतम पद तक पहुंचने से वंचित रह जाते हैं। इस नीति के कारण अधिकारियों में भी असंतोष उत्पन्न होता है, भले ही वे इसे व्यक्त न कर सकें। वर्तमान में, सरकार सेवा विस्तार के मामले में अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ रही है।


विक्रम मिस्री का सेवा विस्तार

हाल ही में, विदेश सचिव विक्रम मिस्री को एक साल का सेवा विस्तार दिया गया है, जिससे वे अब 14 जुलाई 2027 तक इस पद पर बने रहेंगे। ध्यान देने योग्य बात यह है कि जब उन्हें 14 जुलाई 2024 को विदेश सचिव नियुक्त किया गया था, तब भी उनकी रिटायरमेंट की तारीख नवंबर 2024 थी। इस प्रकार, उन्हें 19 महीने का सेवा विस्तार मिला था। अब एक बार फिर उन्हें एक साल का विस्तार दिया गया है।


इसी प्रकार, सीबीआई के निदेशक प्रवीण सूद को भी एक साल का सेवा विस्तार मिला है, जिससे वे कम से कम चार साल तक इस पद पर रहेंगे। इसके अलावा, ईडी के पूर्व प्रमुख संजय मिश्रा को भी लंबे समय तक सेवा विस्तार मिला था। सरकार यह सुनिश्चित करती है कि रिटायरमेंट के बाद भी अपने पसंदीदा अधिकारियों को विभिन्न पदों पर रखा जाए। हाल ही में, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को एचडीएफसी बैंक का पार्ट टाइम चेयरमैन नियुक्त किया गया है।