सरकार ने डीजल और एटीएफ पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई, हवाई यात्रा पर असर
नई एक्सपोर्ट ड्यूटी की घोषणा
शनिवार को वित्त मंत्रालय ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर एक्सपोर्ट ड्यूटी में उल्लेखनीय वृद्धि की घोषणा की है। पेट्रोल पर ड्यूटी में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है, और नई दरें तुरंत प्रभाव से लागू हो गई हैं।
ड्यूटी में वृद्धि का विवरण
वित्त मंत्रालय के अनुसार, डीजल पर एक्सपोर्ट ड्यूटी 21.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 55.5 रुपये प्रति लीटर हो गई है। वहीं, एटीएफ पर ड्यूटी 29.5 रुपये से बढ़कर 42 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है। पेट्रोल पर ड्यूटी पहले की तरह शून्य ही रहेगी।
हवाई यात्रा पर प्रभाव
सरकार ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि विदेश में महंगे ईंधन के कारण हवाई टिकटों की कीमतें न बढ़ें। अधिकारी टैक्स और शुल्क से संबंधित उपायों की समीक्षा कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य वैश्विक तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच एयरलाइंस और यात्रियों को राहत प्रदान करना है।
पश्चिम एशिया में संघर्ष का प्रभाव
पहले 26 मार्च को लगाई गई ड्यूटी का उद्देश्य पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के दौरान देश में ईंधन की उपलब्धता बढ़ाना था। इसके साथ ही निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों का लाभ उठाने से रोकना भी था। उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर सैन्य हमले किए थे, जिसके बाद तेहरान ने भी जवाबी कार्रवाई की।
मध्य पूर्व में युद्ध का असर
इस संघर्ष ने मध्य पूर्व के ऊर्जा बाजार को गंभीर रूप से प्रभावित किया। 8 अप्रैल को तीनों देशों के बीच दो हफ्ते के सीजफायर पर सहमति बनी। इस दौरान तेल की सप्लाई और कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया। सरकार अब घरेलू बाजार में डीजल और एटीएफ की पर्याप्त सप्लाई बनाए रखना चाहती है ताकि आम लोगों और हवाई यात्रियों पर बोझ न पड़े।
वैश्विक तेल की कीमतों में अनिश्चितता
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तेल की कीमतों में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में सरकार का यह निर्णय सही समय पर लिया गया है। इससे पेट्रोल-डीजल की घरेलू कीमतें स्थिर रहने में मदद मिलेगी और हवाई किराए भी नियंत्रण में रहेंगे।
यात्रियों और उद्योगों के लिए राहत
हवाई यात्रा करने वालों के लिए यह निर्णय राहत भरा हो सकता है। इसके अलावा, ट्रांसपोर्ट और उद्योग क्षेत्र को भी लाभ होगा, जहां डीजल का उपयोग अधिक होता है।