सरकार ने डीजल में एथेनॉल मिलाने की योजना से किया इनकार, खाना बनाने में होगा उपयोग
डीजल में एथेनॉल मिलाने की योजना पर सरकार का स्पष्टीकरण
पेट्रोल में एथेनॉल की मिलावट के विवाद के बीच, केंद्र सरकार ने डीजल में एथेनॉल मिलाने की किसी भी योजना को खारिज कर दिया है। सरकार का कहना है कि डीजल में एथेनॉल मिलाने से इसका फ्लैश पॉइंट बहुत कम हो जाता है, जिससे यह संभव नहीं है।
फ्लैश पॉइंट का मुद्दा
सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं और ऑटोमोबाइल कंपनियों के सहयोग से डीजल में एथेनॉल की मिलावट का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया है। केंद्रीय पेट्रोलियम राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने 10 अगस्त को लोकसभा में बताया कि परीक्षण के दौरान एथेनॉल मिश्रित डीजल का फ्लैश पॉइंट सामान्य डीजल के स्तर तक नहीं पहुंचा।
आइसोब्यूटेनॉल का उपयोग नहीं
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पेट्रोल में 20% से अधिक एथेनॉल मिलाने पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है और वर्तमान में डीजल में आइसोब्यूटेनॉल का उपयोग नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भविष्य में पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने का निर्णय वैज्ञानिक अध्ययनों और संबंधित हितधारकों के परामर्श के बाद लिया जाएगा।
एथेनॉल का उपयोग खाना बनाने में
सरकार ने खाना बनाने के लिए वैकल्पिक ईंधन के रूप में एथेनॉल के उपयोग को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। मंत्री ने कहा कि एथेनॉल का उपयोग खाना पकाने के लिए एक संभावित जैव ईंधन के रूप में किया जा सकता है, जो जीवाश्म ईंधन के विकल्प के रूप में कार्य करेगा।
प्रयासरत कंपनियां
इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने मिलकर एथेनॉल पर आधारित खाना पकाने के साफ-सुथरे विकल्प विकसित करने की दिशा में प्रयास शुरू किए हैं।