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सरकार ने बिना विवाद के राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान का बिल पास किया

सरकार ने राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से संबंधित बिल को बिना किसी विवाद के पास कर दिया है। इस प्रक्रिया में विपक्ष ने चर्चा से दूरी बनाई, जिससे यह मुद्दा और भी संवेदनशील बन गया। कुछ सांसदों ने इसका विरोध किया, लेकिन अधिकांश ने चुप्पी साधे रखी। जानें इस बिल के पारित होने के पीछे की रणनीतियाँ और विपक्ष की चुप्पी के कारण।
 

बिल का पास होना और विपक्ष की चुप्पी


यह आश्चर्यजनक है कि सरकार ने राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से संबंधित बिल को बिना किसी बड़े विवाद या चर्चा के पारित कर दिया। कुछ सांसदों, जैसे असदुद्दीन ओवैसी, ने इसका विरोध किया, लेकिन अधिकांश विपक्षी सांसद इस मुद्दे पर चुप रहे। विपक्ष ने इस विषय पर अनौपचारिक चर्चा से भी दूरी बनाई। संसद परिसर में विपक्ष के सांसदों को पत्रकारों से यह कहते हुए सुना गया कि इस विषय को छोड़ दिया जाए। यह एक संवेदनशील मुद्दा था, जिसमें किसी भी स्टैंड का लेना विपक्ष के लिए हानिकारक हो सकता था।


विपक्ष की रणनीति और चर्चा की अनुपस्थिति

याद करें कि वंदे मातरम के डेढ़ सौ साल पूरे होने पर एक दिन की चर्चा हुई थी, जिसमें प्रियंका गांधी वाड्रा ने हल्की-फुल्की बातें की थीं और वंदे मातरम के पहले दो अंतरों को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में स्वीकार करने की बात कही थी। लेकिन इस बिल पर चर्चा के दौरान राहुल और प्रियंका दोनों अनुपस्थित रहे। कांग्रेस के अनुभवी नेताओं का कहना है कि कोई भी विपक्षी नेता इस पर स्टैंड लेना नहीं चाहता था। यदि कोई बिल का जोरदार विरोध करता, तो बहुसंख्यक हिंदू समाज में गलत संदेश जा सकता था। वहीं, यदि समर्थन करते या गोलमोल बातें करते, तो मुस्लिम समाज में नाराजगी हो सकती थी। इसलिए विपक्ष ने चर्चा से दूर रहने का निर्णय लिया। सरकार तो बिल पास करवा ही लेती, लेकिन विपक्ष की अनिच्छा ने इसे और भी आसान बना दिया।