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सरकारी अधिकारियों का निजी कंपनियों में शामिल होना: क्या यह नीति पर खतरा है?

हाल के वर्षों में, कई शीर्ष सरकारी अधिकारी सेवानिवृत्ति के बाद निजी कंपनियों में शामिल हो रहे हैं, जिससे सरकारी नीतियों की गोपनीयता और हितों के टकराव का खतरा बढ़ रहा है। इस प्रवृत्ति को 'रिवॉल्विंग डोर' कहा जाता है, जिसमें अधिकारी अपनी अंदरूनी जानकारी का उपयोग कंपनियों को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ दिलाने के लिए कर सकते हैं। जानिए किन अधिकारियों ने अडानी और रिलायंस जैसी कंपनियों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं ग्रहण की हैं और इसके संभावित प्रभाव क्या हो सकते हैं।
 

लखनऊ में सरकारी अधिकारियों की नई प्रवृत्ति


लखनऊ: पिछले कुछ वर्षों से विपक्ष ने सरकार पर उद्योगपतियों के प्रति पक्षपाती होने का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अडानी और अंबानी के साथ करीबी रिश्तों पर सवाल उठाए हैं। हाल ही में, एक चिंताजनक प्रवृत्ति सामने आई है, जिसमें सेवानिवृत्त और नौकरी छोड़ने वाले शीर्ष सरकारी अधिकारी बड़ी कंपनियों में शामिल हो रहे हैं। इस बदलाव से सरकारी नीतियों की गोपनीयता और हितों के टकराव का खतरा बढ़ता है।


जब सिविल सेवा के अधिकारी सेवानिवृत्त होते हैं या इस्तीफा देते हैं, तो उनका निजी कंपनियों से जुड़ना सरकारी नीतियों की गोपनीयता को प्रभावित कर सकता है। इसे कॉर्पोरेट और राजनीतिक क्षेत्र में 'रिवॉल्विंग डोर' कहा जाता है। इन अधिकारियों को सरकार की भविष्य की नीतियों, बजट प्रस्तावों, और संवेदनशील रक्षा समझौतों की जानकारी होती है। यदि कोई अधिकारी तुरंत किसी निजी कंपनी में शामिल होता है, तो वह इस जानकारी का उपयोग उस कंपनी को प्रतिस्पर्धियों पर बढ़त दिलाने के लिए कर सकता है।


इसके अलावा, सेवा में रहते हुए भी अधिकारी भविष्य में किसी कंपनी में बड़ी नौकरी पाने की लालसा में उसके पक्ष में नीतियां बना सकते हैं। पूर्व अधिकारियों के संबंध अभी भी सेवा में मौजूद अपने जूनियर या सहकर्मियों से होते हैं, और निजी कंपनियां इन संबंधों का उपयोग सरकारी निर्णयों को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए करती हैं।


हाल के वर्षों में अडानी और रिलायंस में शामिल हुए अधिकारी

1- आई. सी. पी. केशरी: मध्य प्रदेश कैडर के 1988 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आई.सी.पी. केशरी दिसंबर 2023 में अडानी ग्रुप में शामिल हुए। वे ग्रुप में इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी के सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं।


2- दिनेश कुमार मित्तल: 1977 बैच के पूर्व वित्तीय सेवा सचिव डी.के. मित्तल को जून 2023 में अडानी ग्रुप के नियंत्रण वाली कंपनी NDTV के बोर्ड में गैर-कार्यकारी स्वतंत्र निदेशक नियुक्त किया गया।


3- उपेंद्र कुमार सिन्हा: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष यू.के. सिन्हा मार्च 2023 में NDTV के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष बने।


4- दीपक अमिताभ: 1984 बैच के पूर्व आईआरएस अधिकारी दीपक अमिताभ नवंबर 2021 में अडानी ग्रुप में शामिल हुए।


5- अमन कुमार सिंह: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री सचिवालय के पूर्व आईआरएस अधिकारी अमन कुमार सिंह नवंबर 2022 में अडानी ग्रुप से जुड़े।


6- सुनील कुमार: छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्य सचिव सुनील कुमार भी दिसंबर 2022 में अडानी ग्रुप द्वारा संचालित NDTV के बोर्ड में शामिल हुए।


7- अजय कुमार तोमर: गुजरात कैडर के पूर्व पुलिस महानिदेशक अजय कुमार तोमर सेवानिवृत्ति के बाद अडानी ग्रुप में शामिल हुए।


8- कपिल राज: प्रवर्तन निदेशालय के पूर्व जॉइंट डायरेक्टर कपिल राज 2025 में रिलायंस इंडस्ट्रीज में शामिल हुए।


9- के. वी. चौधरी: भारतीय राजस्व सेवा के पूर्व अधिकारी के.वी. चौधरी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक के रूप में शामिल हुए।


10- आर. एस. गुजराल: हरियाणा कैडर के पूर्व केंद्रीय वित्त सचिव आर.एस. गुजराल ने अडानी और रिलायंस दोनों के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक के रूप में कार्य किया।


11- जयंत परीमल: 1989 बैच के पूर्व आईएएस अधिकारी जयंत परीमल ने अडानी समूह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।