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सरकारी चिकित्सकों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर उठे सवाल, जांच टीम गठित

नौतनवा नगर के भाजपा नेता जितेंद्र जायसवाल ने सरकारी चिकित्सकों पर प्राइवेट प्रैक्टिस करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री और मुख्य चिकित्साधिकारी को पत्र भेजकर इस मुद्दे की जांच की मांग की है। इसके बाद मुख्य चिकित्साधिकारी ने तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया है, जो तीन दिन में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और इसके संभावित परिणाम।
 

भाजपा नेता का गंभीर आरोप

नौतनवा नगर के भाजपा नेता जितेंद्र जायसवाल ने मुख्यमंत्री और मुख्य चिकित्साधिकारी को एक पत्र भेजकर सरकारी चिकित्सकों पर नियमों का उल्लंघन करते हुए प्राइवेट प्रैक्टिस करने का आरोप लगाया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि सरकार की स्पष्ट निर्देशों और प्राइवेट प्रैक्टिस न करने के लिए दिए जा रहे 25 प्रतिशत अतिरिक्त भत्ते के बावजूद, कई सरकारी चिकित्सक निजी क्लीनिक चला रहे हैं।


प्राइवेट क्लीनिकों पर ध्यान केंद्रित

जायसवाल ने कहा कि इन चिकित्सकों का ध्यान सरकारी अस्पतालों की तुलना में निजी क्लीनिकों पर अधिक होता है। मरीजों को प्राइवेट क्लीनिक में जाकर बेहतर इलाज की सलाह दी जाती है, जिससे सरकारी अस्पतालों की सेवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है और सरकारी राजस्व को भी नुकसान हो रहा है। उन्होंने ऐसे चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।


जांच टीम का गठन

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. श्रीकांत शुक्ला ने मामले का संज्ञान लेते हुए तुरंत तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया है। इस टीम में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राकेश कुमार, डॉ. नवनाथ प्रसाद और डॉ. वीरेंद्र आर्या शामिल हैं। टीम को तीन दिन के भीतर अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। सीएमओ ने कहा कि रिपोर्ट के आधार पर संबंधित चिकित्सकों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।