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सहारनपुर में दहेज रहित शादी ने दिया समाज को सशक्त संदेश

सहारनपुर में एक अनोखी शादी ने दहेज प्रथा के खिलाफ एक मजबूत संदेश दिया है। मेजर मधुर चौधरी और कैप्टन ज्योति सौरोत की शादी में दूल्हे पक्ष ने केवल 1 रुपया और नारियल लिया। इस विवाह ने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की प्रेरणा दी है। जानें इस प्रेरणादायक कहानी के बारे में।
 

दहेज प्रथा के खिलाफ एक अनोखी शादी

सहारनपुर(उत्तर प्रदेश)- उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में एक विवाह ने दहेज प्रथा के खिलाफ एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। एक फौजी परिवार ने परंपराओं से हटकर सादगी और संस्कारों को प्राथमिकता देते हुए बिना दहेज के शादी की।


शगुन में केवल 1 रुपया और नारियल
ग्राम मीरपुर के सेवानिवृत्त सैनिक चौधरी ओमपाल सिंह के बेटे मेजर मधुर चौधरी का विवाह ब्रज क्षेत्र की कैप्टन ज्योति सौरोत के साथ हुआ। इस शादी की खासियत यह रही कि दूल्हे पक्ष ने वधू पक्ष से केवल एक रुपया और एक नारियल ही शगुन के रूप में लिया, जबकि आमतौर पर ऐसी शादियों में बड़े लेन-देन की परंपरा होती है।


“संस्कारों की असली संपत्ति”
दूल्हे के पिता चौधरी ओमपाल सिंह ने बताया कि उनके पास कई प्रतिष्ठित परिवारों से रिश्ते आए थे, लेकिन उन्होंने पहले ही तय कर लिया था कि विवाह दहेज रहित होगा। दूल्हे की मां ने भावुक होकर कहा कि असली समृद्धि धन-दौलत में नहीं, बल्कि एक संस्कारी बहू में होती है, जो दो परिवारों को जोड़ती है।


बचपन का संकल्प, जीवन का निर्णय
मेजर मधुर चौधरी ने बताया कि छात्र जीवन में दहेज के कारण होने वाले विवादों और उत्पीड़न की खबरें उन्हें गहराई से प्रभावित करती थीं। उन्होंने संकल्प लिया था कि वे जीवन में कभी दहेज नहीं लेंगे। सेना में अधिकारी बनने के बाद उन्होंने अपने इस फैसले को परिवार के सामने रखा, जिसे माता-पिता ने पूरे दिल से स्वीकार किया।


समाज के लिए प्रेरणा
यह विवाह न केवल स्थानीय क्षेत्र में बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है। मेजर मधुर ने युवाओं से अपील की है कि वे दहेज जैसी कुरीतियों के खिलाफ आगे आएं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का साहस दिखाएं। यह अनोखी शादी आज के दौर में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है, जो यह साबित करती है कि बदलाव की शुरुआत व्यक्तिगत निर्णयों से ही होती है।