साइक्लोन दितवाह: श्रीलंका में तबाही और भारत पर संभावित खतरा
श्रीलंका में साइक्लोन का कहर
नई दिल्ली: बंगाल की खाड़ी से उत्पन्न साइक्लोन दितवाह ने श्रीलंका में भारी तबाही मचाई है, जिससे पूरा देश प्रभावित हुआ है। इस प्राकृतिक आपदा के कारण 56 लोगों की जान चली गई है और 21 लोग लापता हैं। सरकार ने इसे आपातकालीन स्थिति मानते हुए शुक्रवार को सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा की है। स्कूल, ट्रेन सेवाएं और कोलंबो स्टॉक एक्सचेंज भी बंद कर दिए गए हैं। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि तूफान की तीव्रता अगले कुछ घंटों में बढ़ सकती है। लोग छतों पर फंसे हुए हैं और बचाव दल लगातार राहत कार्य में जुटे हैं।
क्या लोग सुरक्षित निकल पाएंगे?
डिजास्टर मैनेजमेंट सेंटर के अनुसार, 43,991 नागरिकों को स्कूलों और सार्वजनिक शेल्टर में सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है। कई गांवों में भूस्खलन के कारण सड़कें अवरुद्ध हो गई हैं। ब्रिगेडियर एस. धर्मविक्रमा ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्य जारी है, लेकिन वहां पहुंचना कठिन हो रहा है। पिछले 24 घंटों में 300 मिलीमीटर से अधिक बारिश हुई है, जिससे भूस्खलन की घटनाएं बढ़ी हैं। वर्तमान में तूफान श्रीलंका के त्रिंकोमाली जिले के निकट है। विशेषज्ञों का मानना है कि गर्म समुद्री सतह इसकी गति और ताकत को बढ़ा सकती है। राहत कार्य एक चुनौती बन गया है।
क्या भारत पर भी असर होगा?
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि साइक्लोन दितवाह अब भारत की ओर बढ़ रहा है। तमिलनाडु, पुडुचेरी, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल में अलर्ट जारी किया गया है। अगले 48 घंटों में इसके पहुंचने की संभावना है। समुद्री हवाएं तेज होंगी और तटीय क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने राहत बलों को तैनात कर दिया है। श्रीलंका में इसका प्रभाव जारी है और भारत के दक्षिणी हिस्सों में रात से हवाएं तेज होनी शुरू हो गई हैं।
क्या दो जगह होगा लैंडफॉल?
विशेषज्ञों के अनुसार, यह तूफान श्रीलंका और तमिलनाडु दोनों स्थानों पर लैंडफॉल कर सकता है। दोहरी टक्कर का प्रभाव अधिक खतरनाक हो सकता है। तूफान की दिशा उत्तर-उत्तरपश्चिम और फिर उत्तर की ओर बताई जा रही है। यह मन्नार की खाड़ी और पाक जलडमरूमध्य से गुजरेगा। तटीय गांवों से लोगों को पहले से ही हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। तमिलनाडु के कई जिलों में स्कूल बंद कर दिए गए हैं और बिजली कटौती की तैयारी भी की जा रही है। सरकार ने भाईचारे से काम करने और अफवाहों से बचने की अपील की है।
क्या तूफान और मजबूत होगा?
गर्म समुद्री तापमान इसकी ताकत को बढ़ाने में सहायक होगा। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जब यह जमीन के करीब आएगा, तो सूखी हवाएं इसमें मिलकर तूफान को और लंबा खींच सकती हैं। अगले 48 घंटों तक यह सिस्टम सक्रिय रहेगा। तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण फसलों को भी नुकसान होने की आशंका है। किसान चिंतित हैं क्योंकि पिछले तूफान 'सेन्यार' ने पहले ही नुकसान पहुंचाया है। तूफान के कारण कई उड़ानें डायवर्ट की गई हैं और विमानन सेवाओं पर भी असर पड़ा है।
क्या बड़ा लॉकडाउन संभव है?
श्रीलंका की स्थिति को देखते हुए भारत में भी स्थानीय स्तर पर प्रतिबंध लागू किए जा सकते हैं। श्रीलंका में लोग अपने घरों में बंद हैं और हालात लॉकडाउन जैसे प्रतीत हो रहे हैं। सरकार ने केवल आवश्यक सेवाओं में लगे कर्मचारियों को बाहर रहने की अनुमति दी है। जनजीवन ठप हो गया है और सैकड़ों परिवार पानी में फंसे हुए हैं। राहत और बचाव टीमें लगातार काम कर रही हैं, हालांकि कई स्थानों पर पहुंचने में समय लग रहा है। प्रशासन ने नागरिकों से शांत रहने की अपील की है।
क्या आगे और तैयारी जरूरी?
नेशनल डिजास्टर रेस्पॉन्स फोर्स ने अपनी टीमों को सक्रिय कर दिया है। तटीय क्षेत्रों में मेडिकल और हेलीकॉप्टर यूनिट तैयार हैं। मछुआरों को गहराई में न जाने की चेतावनी दी गई है। नागरिकों से कहा गया है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें। मौसम विभाग ने कहा है कि अगले 24 घंटे में स्थिति स्पष्ट होगी कि तूफान कितनी ताकत के साथ भारत में प्रवेश करेगा। राहत सामग्री को स्टोर किया जा रहा है और अस्पतालों में भी सतर्कता बढ़ाई गई है। फिलहाल सभी की नजरें बंगाल की खाड़ी पर टिकी हुई हैं।