×

सिक्किम ने स्थापित की भारत की पहली पेपरलेस न्यायपालिका

सिक्किम ने भारत की पहली पेपरलेस न्यायपालिका की स्थापना की है, जिससे न्याय प्रणाली में एक नया और पारदर्शी युग शुरू हुआ है। इस परिवर्तन की घोषणा मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने की, जिसमें अदालती कार्यवाही पूरी तरह से तकनीक-आधारित होगी। इस सम्मेलन में न्यायाधीशों और कानूनी विशेषज्ञों ने न्यायपालिका के डिजिटल कायाकल्प पर चर्चा की। यह कदम न केवल न्याय में देरी को समाप्त करेगा, बल्कि आम नागरिकों के लिए न्याय को सुलभ और पारदर्शी बनाएगा। जानें इस ऐतिहासिक परिवर्तन के बारे में और अधिक।
 

गंगटोक में नई न्याय प्रणाली की शुरुआत

गंगटोक: भारतीय न्याय व्यवस्था में एक नई और पारदर्शी दिशा की ओर कदम बढ़ाया गया है। सिक्किम ने देश का पहला ‘पेपरलेस न्यायपालिका’ राज्य बनकर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित किया है। अब यहां की अदालती प्रक्रियाएं पूरी तरह से तकनीकी रूप से संचालित होंगी, जिसमें कागजों का उपयोग न्यूनतम होगा। इस परिवर्तन की आधिकारिक घोषणा शुक्रवार (1 मई) को गंगटोक में आयोजित एक विशेष सम्मेलन में भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने की।


डिजिटल तकनीक से बढ़ी न्याय की पहुंच

सीजेआई सूर्यकांत ने इस ऐतिहासिक अवसर पर बताया कि पहले न्याय की उम्मीद में बैठे लोगों के लिए दूरी केवल किलोमीटर में नहीं, बल्कि यात्रा के दिनों और रास्तों की कठिनाइयों में मापी जाती थी। लेकिन अब बेहतर बुनियादी ढांचे और तकनीक ने इस पहुंच को पूरी तरह से बदल दिया है। डिजिटल माध्यम अब आम नागरिकों को सीधे न्यायिक मंचों से जोड़ रहा है, और हम कागजी कार्यवाही के पुराने युग से आगे बढ़ चुके हैं। इस दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर के न्यायाधीश, कानूनी विशेषज्ञ और नीति निर्माता न्यायपालिका के डिजिटल परिवर्तन पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।


न्याय में देरी का अंत

कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी ने सिक्किम की इस उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने इसे एक महत्वपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि यह तकनीक मानव निर्णयों का स्थान नहीं लेगी, बल्कि उन भौतिक बाधाओं को समाप्त करेगी जो न्याय में देरी का कारण बनती हैं। अब गुम होने वाली फाइलें और दस्तावेजों का ढेर न्याय के रास्ते में बाधा नहीं बनेगा। सिक्किम उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ए. मोहम्मद मुस्ताक ने इसे राज्य और भारतीय न्यायपालिका के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया।


न्याय को सुलभ और पारदर्शी बनाना

सिक्किम हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति भास्कर राज प्रधान ने कहा कि तकनीक का उपयोग अदालतों को तेज, निष्पक्ष और सस्ता बनाने के लिए होना चाहिए। साथ ही, यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि इस डिजिटल प्रगति से समाज के हाशिए पर पड़े लोग अलग-थलग न पड़ें। सिक्किम के एडवोकेट जनरल बसवा प्रभु एस पाटिल ने बताया कि पेपरलेस होने का मतलब कागजों का अनादर नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी नागरिक न्याय के लिए भटकने न पड़े।


सिक्किम के 50वें वर्ष में ऐतिहासिक कदम

इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में भारत के अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमानी, जस्टिस रोनी जेम्स गोविंदन, सिक्किम उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति मीनाक्षी मदन राय और राज्य के मुख्यमंत्री पी.एस. तमांग ने भी अपने विचार साझा किए। मुख्यमंत्री तमांग ने इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि सिक्किम अपने 50 वर्षों का जश्न मना रहा है। ऐसे में सीजेआई सूर्यकांत और अन्य विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में देश की पहली पेपरलेस न्यायपालिका की घोषणा करना पूरे राज्य के लिए गर्व की बात है।