सिद्धार्थ मृदुल की गैस एजेंसी विवाद: जज रहते हुए चलाते रहे व्यवसाय
दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज का विवादास्पद मामला
दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश और बाद में मणिपुर के मुख्य न्यायाधीश रहे सिद्धार्थ मृदुल के बारे में एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। यह पता चला है कि उन्होंने न्यायाधीश रहते हुए एक गैस एजेंसी का संचालन किया। संवैधानिक पद पर रहने वाले व्यक्तियों के लिए यह नैतिक रूप से अनुचित माना जाता है। जब इस मामले की शिकायत की गई, तो भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा। जब उन्होंने कोई उत्तर नहीं दिया, तो उनकी डीलरशिप रद्द कर दी गई। इस दौरान, वह मणिपुर के मुख्य न्यायाधीश बने और अब वह रिटायर हो चुके हैं।
सिद्धार्थ मृदुल का करियर
सिद्धार्थ मृदुल ने 1986 में वकालत की शुरुआत की और सबसे पहले दिल्ली हाई कोर्ट में वकील बने। लगभग 22 वर्षों तक वकालत करने के बाद, वह मार्च 2008 में दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायाधीश बने। अक्टूबर 2023 में उन्हें मणिपुर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया। इस दौरान, उन्होंने अपनी गैस एजेंसी का संचालन जारी रखा। उन्होंने न तो गैस एजेंसी को छोड़ने का निर्णय लिया और न ही कंपनी ने इस पर ध्यान दिया। उनकी डीलरशिप का अंतिम नवीनीकरण 2025 में हुआ था, जो 2030 तक चलने वाली थी, लेकिन अब इसे रद्द कर दिया गया है।
गैस एजेंसी का संचालन
सिद्धार्थ मृदुल को पहली बार 1984 में LPG की एजेंसी मिली थी। BPCL की यह एजेंसी उनकी कंपनी 'Kitchen Flame' के नाम पर थी। उनकी एजेंसी का नवीनीकरण 1995, 2005, 2010, 2015 और 2025 में होता रहा। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, हालिया अनुबंध पर सिद्धार्थ मृदुल की तस्वीर भी थी और उन्होंने 'Kitchen Flame' की ओर से हस्ताक्षर किए थे।
नैतिकता का उल्लंघन
भारत में पारदर्शिता के नियमों के अनुसार, न्यायाधीशों को यह बताना आवश्यक होता है कि वे किन कंपनियों में शेयरहोल्डर हैं। सिद्धार्थ मृदुल ने इस नियम का उल्लंघन किया। उन्होंने कभी यह नहीं बताया कि उनके पास एक गैस एजेंसी है। जब BPCL ने उन्हें नोटिस भेजा, तो उन्होंने उसका उत्तर भी नहीं दिया।
BPCL को सिद्धार्थ मृदुल के खिलाफ एक शिकायत मिली थी, जिसमें कहा गया था कि वह न्यायाधीश रहे हैं। इसी आधार पर BPCL ने उन्हें नोटिस भेजकर पूछा कि उनकी डीलरशिप क्यों न रद्द की जाए। BPCL ने अपने नोटिस में लिखा कि यह डीलरशिप के नियमों के खिलाफ है। BPCL ने 30 जनवरी और 26 फरवरी को भी उन्हें पत्र लिखा, लेकिन कोई उत्तर नहीं मिला।
डीलरशिप का रद्द होना
इस स्थिति में, BPCL ने 6 जुलाई को उनकी डीलरशिप रद्द कर दी। इसके अलावा, दो महीने पहले, सिद्धार्थ मृदुल के 'Kitchen Flame' के प्रबंधक दीपक यादव की विधवा मोनिका यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें BPCL से अनुरोध किया गया था कि उनकी शिकायत पर ध्यान दिया जाए और एजेंसी के स्वामित्व का पुनर्गठन उनके पक्ष में किया जाए। हाई कोर्ट ने BPCL को निर्देश दिया था कि दो महीने में उनकी याचिका पर निर्णय लिया जाए। अब जब BPCL ने सिद्धार्थ मृदुल की डीलरशिप रद्द कर दी है, तो मोनिका यादव ने फिर से हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और आरोप लगाया है कि BPCL ने उनकी अपील पर ध्यान नहीं दिया।