सिम कार्ड धोखाधड़ी पर सख्त कार्रवाई, 3 साल की जेल और 50 लाख का जुर्माना
सिम कार्ड की धोखाधड़ी पर सरकार की चेतावनी
नई दिल्ली: वर्तमान डिजिटल युग में, सब्सक्राइबर आइडेंटिटी मॉड्यूल यानी सिम कार्ड अब केवल बातचीत का साधन नहीं रह गया है। यह बैंक खातों, यूपीआई लेन-देन, वित्तीय सेवाओं और संवेदनशील ओटीपी से जुड़ा होता है। ऐसे में, फर्जी पहचान या किसी अन्य व्यक्ति के दस्तावेजों का उपयोग करके सिम प्राप्त करने वालों पर सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं। दूरसंचार विभाग (DoT) ने एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है, जिसमें नागरिकों को चेतावनी दी गई है कि फर्जी तरीके से सिम प्राप्त करना और टेलीकॉम आइडेंटिफायर का दुरुपयोग करना गंभीर अपराध है।
कानूनी प्रावधान और दंड
टेलीकम्युनिकेशन एक्ट के तहत सजा:
दूरसंचार विभाग के अनुसार, टेलीकम्युनिकेशन एक्ट, 2023 की धारा 42(3)(e) के तहत यदि कोई व्यक्ति धोखाधड़ी या किसी अन्य की पहचान का अनधिकृत उपयोग करके सिम कार्ड सक्रिय करता है, तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस अपराध के लिए दोषी पाए जाने पर व्यक्ति को 3 साल तक की जेल, 50 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजाएं मिल सकती हैं। यह अधिकतम सीमा है, और अदालत अपराध की गंभीरता के अनुसार सजा और जुर्माना तय करेगी। यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य नागरिक की जानकारी के बिना उसके पहचान पत्रों का दुरुपयोग कर सिम चलाता है, तो उस पर गैर-जमानती कार्रवाई की जाएगी।
साजिश में शामिल लोगों पर भी कार्रवाई
साजिश रचने वालों के लिए सजा:
कानून में केवल फर्जी सिम का उपयोग करने वाले के लिए ही नहीं, बल्कि इस कार्य में सहयोग करने वाले सभी लोगों के खिलाफ भी कड़े प्रावधान हैं। एक्ट की धारा 42(6) के तहत इस तरह के अपराध में मदद करने, प्रयास करने या आपराधिक साजिश रचने वाले दुकानदारों और सहयोगियों के लिए समान सजा और कानूनी दंड निर्धारित किया गया है। फर्जी दस्तावेजों के जरिए अवैध सिम जारी करने वाली दुकानों और गिरोहों को भी इस कानून के दायरे में लाया जाएगा।
संचार साथी पोर्टल से करें सिम की जांच
सिम कनेक्शनों की जांच:
साइबर अपराधों से नागरिकों की सुरक्षा के लिए, दूरसंचार विभाग ने सभी मोबाइल उपयोगकर्ताओं को सलाह दी है कि वे समय-समय पर अपने पहचान पत्रों पर चल रहे सिम कनेक्शनों की जांच करें। इसके लिए नागरिक सरकार के आधिकारिक 'संचार साथी' पोर्टल और ऐप का उपयोग कर सकते हैं। पोर्टल पर मोबाइल नंबर दर्ज करते ही यह पता चल जाता है कि संबंधित व्यक्ति के नाम पर कितने एक्टिव कनेक्शन हैं। यदि सूची में कोई ऐसा नंबर दिखाई देता है जो उपयोगकर्ता ने नहीं खरीदा, तो उसे तुरंत उसी पोर्टल पर ब्लॉक और रिपोर्ट किया जा सकता है, जिससे भविष्य में किसी भी कानूनी समस्या से बचा जा सके।