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सिरोही में मृत्युभोज पर घी के मालपुए न बनाने पर 43 परिवारों का बहिष्कार

सिरोही के मंडवारिया गांव में एक गरीब परिवार ने आर्थिक तंगी के चलते मृत्युभोज में घी के मालपुए बनाने से मना कर दिया, जिसके बाद समाज के पंचों ने 43 परिवारों का बहिष्कार कर दिया। अब इन परिवारों को राशन और पानी की आपूर्ति नहीं मिल रही है। पीड़ित परिवारों ने जिला कलेक्टर से न्याय की गुहार लगाई है। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और इसके पीछे की वजहें।
 

राशन और पानी की आपूर्ति पर रोक


सिरोही, मंडवारिया गांव: आर्थिक कठिनाइयों के चलते एक गरीब परिवार ने मृत्युभोज में 'घी के मालपुए' बनाने से मना कर दिया। इस पर समाज के लोगों ने नाराज होकर उनका हुक्का-पानी बंद करने का आदेश जारी कर दिया। इस परिवार का समर्थन करने वाले 42 अन्य परिवारों पर भी यही कार्रवाई की गई।


मेहमानों के आने पर रोक

इस परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि वे अंतिम संस्कार का खर्च भी मुश्किल से जुटा पाए थे। उन्होंने समाज से सादा भोजन परोसने की विनती की, लेकिन पंचों को यह स्वीकार नहीं था। उन्हें लगा कि बिना घी के मालपुए के मृत्युभोज करना उनके मान-सम्मान के खिलाफ है।


अब इन परिवारों को न तो दुकानदार राशन दे रहे हैं और न ही कुएं से पानी भरने दिया जा रहा है। इसके अलावा, उनके घरों में मेहमानों के आने और रिश्तेदारी में जाने पर भी रोक लगा दी गई है।


पंचों के फरमान का असर

पंचों के आदेश की अनदेखी करने पर 11 हजार रुपये का जुर्माना और पूरे समाज को सामूहिक भोजन का दंड भुगतना होगा। यह मामला सिरोही के बरलूट थाना क्षेत्र के मंडवारिया गांव का है। पीड़ित परिवारों ने अब जिला कलेक्टर से शिकायत की है।


परिवारों की दयनीय स्थिति

पीड़ित परिवारों ने बताया कि गांव में 5 जून को सदाराम का निधन हुआ था। 17 जून को हुए मृत्युभोज में उनकी आर्थिक स्थिति के कारण घी के मालपुए नहीं बन सके। इस पर समाज के पंच इतने नाराज हुए कि उन्होंने 18 जून को फरमान जारी कर इस परिवार सहित 43 परिवारों को समाज से बाहर कर दिया।


कलेक्टर से न्याय की गुहार

इन परिवारों का जीना मुश्किल हो गया है। दुकानदार उन्हें राशन नहीं दे रहे और खेत मालिक भी उन्हें काम पर नहीं रख रहे हैं। यहां तक कि सार्वजनिक कुएं से पानी भरने की भी अनुमति नहीं है। राशन न मिलने के कारण बच्चे भूखे सो रहे हैं।


20 जून को पीड़ितों ने बरलूट थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी, लेकिन पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इससे परेशान होकर सभी 43 परिवारों के लोग सिरोही कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर न्याय की मांग की।