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सीजफायर के बावजूद होर्मुज स्ट्रेट में नाविकों की जिंदगी खतरे में

मिडिल ईस्ट में 40 दिनों तक चले युद्ध के बाद अमेरिका और ईरान ने सीजफायर पर सहमति जताई है, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट में 20,000 नाविकों की जिंदगी अब भी संकट में है। जहाजों के कप्तान युद्ध के डर से आगे बढ़ने से इनकार कर रहे हैं, जबकि राहत सामग्री भी नहीं पहुंच पा रही है। जानें इस गंभीर स्थिति के पीछे के कारण और जहाज मालिकों की चिंताएं।
 

सीजफायर के बाद भी संकट में फंसे नाविक

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में लगभग 40 दिनों तक चले भीषण संघर्ष के बाद, अमेरिका और ईरान ने अंततः सीजफायर पर सहमति जताई है। इस समझौते में होर्मुज स्ट्रेट को खोलने की शर्त भी शामिल है, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है। सीजफायर की घोषणा के बावजूद, होर्मुज स्ट्रेट में 20,000 से अधिक नाविकों की जिंदगी अब भी संकट में है। वर्तमान में, खाड़ी क्षेत्र में लगभग 2000 मालवाहक जहाज फंसे हुए हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि नाविकों के पास भोजन और पीने का पानी भी समाप्त हो रहा है। यह केवल संसाधनों की कमी नहीं है, बल्कि मौत का डर इतना बढ़ गया है कि जहाजों के कप्तान अपने जहाजों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार नहीं हैं।


समुद्र में फंसी 20,000 जिंदगियां

युद्ध के आरंभ होते ही, ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह बंद कर दिया था, जिसके कारण धीरे-धीरे 2000 से अधिक जहाज फंस गए। महीनों से समुद्र में खड़े इन जहाजों पर राशन और पीने के पानी का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है। सीजफायर के निर्णय के बावजूद, नाविकों की समस्याएं कम नहीं हो रही हैं। इन जहाजों से लगातार इमरजेंसी संदेश भेजे जा रहे हैं, जिनमें नाविक भूख और प्यास जैसी गंभीर समस्याओं का उल्लेख कर रहे हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि युद्ध के इस भयावह माहौल में, बंदरगाहों से कोई भी राहत सामग्री इन जहाजों तक नहीं पहुंच पा रही है। इस प्रकार, समुद्र के बीच 20,000 जिंदगियां संकट में हैं।


सीजफायर के बावजूद जहाज क्यों नहीं निकल रहे?

यह सवाल उठता है कि सीजफायर होने के बावजूद ये जहाज वहां से बाहर क्यों नहीं आ रहे हैं। वास्तव में, अमेरिका और ईरान के बीच यह सीजफायर बेहद नाजुक स्थिति में है और दोनों पक्षों से हमले पूरी तरह से बंद नहीं हुए हैं। ईरानी मीडिया की रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि होर्मुज को फिर से बंद कर दिया गया है। इस प्रकार, यह क्षेत्र नाविकों के लिए एक 'डेथ जोन' में बदल गया है। जहाजों के कप्तान और क्रू मेंबर्स अपनी जान को लेकर इतने चिंतित हैं कि उन्होंने आगे बढ़ने से साफ इनकार कर दिया है। उन्हें डर है कि समुद्र में किसी भी समय उनके जहाज पर मिसाइल या ड्रोन से हमला हो सकता है। कप्तानों ने अपनी कंपनियों को स्पष्ट संदेश भेज दिया है कि वे अपनी और अपने क्रू की जान को जोखिम में डालकर इस खतरनाक स्ट्रेट को पार करने का जोखिम नहीं उठाएंगे।


जहाज मालिकों को करोड़ों के नुकसान का डर

होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा बीमा कंपनियों के सख्त रवैये से लगाया जा सकता है। सीजफायर की घोषणा के बाद भी, कोई भी समुद्री बीमा कंपनी इन जहाजों और उन पर लदे अरबों डॉलर के कीमती माल की सुरक्षा की गारंटी लेने को तैयार नहीं है। बीमा कंपनियों ने मौजूदा हालात को बेहद जोखिम भरा मानते हुए कवरेज देने से साफ इनकार कर दिया है। नियमों के अनुसार, बिना बीमा सुरक्षा के कोई भी कमर्शियल जहाज होर्मुज से बाहर नहीं निकल सकता। बीमा कंपनियों के अलावा, शिपिंग कंपनियों के मालिक भी भारी डर के साये में जी रहे हैं। उन्हें इस सीजफायर और शांति वार्ताओं पर अभी तक पूरी तरह भरोसा नहीं हो पा रहा है। उन्हें डर है कि अगर सीजफायर पर भरोसा करके जहाजों को खाड़ी के अंदर भेजा गया और अचानक युद्ध भड़क गया, तो जहाज और क्रू हमेशा के लिए फंस जाएंगे। एक जहाज के नुकसान का मतलब करोड़ों-अरबों रुपये का भारी झटका है, जिसे सहने की स्थिति में फिलहाल कोई भी शिपिंग कंपनी नहीं है।