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सीजेपी में असंतोष: युवाओं ने कोर कमेटी के गठन पर उठाए सवाल

छत्रपति संभाजीनगर में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के भीतर असंतोष की लहर उठी है। युवाओं ने कोर कमेटी के गठन पर आरोप लगाया है कि उन्हें उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आंदोलन में शामिल सभी कार्यकर्ताओं को निर्णय प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए। मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा कि उनका विरोध किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग है। वे तब तक विरोध जारी रखेंगे जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं।
 

नई दिल्ली में सीजेपी का विवाद


नई दिल्ली: छत्रपति संभाजीनगर में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की प्रस्तावित कोर कमेटी को लेकर संगठन के भीतर असंतोष की लहर उठी है। अभिजीत दीपके के निवास के बाहर पहुंचे युवाओं ने नेतृत्व पर पक्षपात और परिवारवाद के आरोप लगाए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में युवाओं ने कोऑर्डिनेटर की भूमिका निभाई थी, लेकिन कोर कमेटी की बैठक में उन्हें स्थान नहीं दिया गया। इस मुद्दे को लेकर युवाओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया है।


कोर कमेटी में प्रतिनिधित्व की कमी

प्रदर्शनकारी यह दावा कर रहे हैं कि आंदोलन के आरंभ से जुड़े कई कार्यकर्ताओं को बैठक से बाहर रखा गया। उनका आरोप है कि अभिजीत दीपके के करीबी लोगों को प्राथमिकता दी गई। युवाओं का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति या समूह का नहीं था, बल्कि यह देशभर के छात्रों और युवाओं की आवाज का प्रतिनिधित्व करता है। इसलिए, संगठनात्मक निर्णयों में सभी प्रमुख कार्यकर्ताओं की भागीदारी होनी चाहिए।


कोऑर्डिनेटर्स की संख्या

करीब 450 कोऑर्डिनेटर्स का दावा


प्रदर्शनकारियों के अनुसार, जंतर-मंतर आंदोलन से लगभग 450 लोग विभिन्न स्तरों पर कोऑर्डिनेटर के रूप में जुड़े थे। उनका कहना है कि इन लोगों ने आंदोलन को आगे बढ़ाने में काफी समय और मेहनत लगाई, लेकिन कोर कमेटी की बैठक में उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं मिला। युवाओं ने पार्टी प्रवक्ता आशुतोष रांका से भी बातचीत की, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला, जिसके बाद उन्होंने विरोध का निर्णय लिया।


अनशन की चेतावनी

अनशन की दी चेतावनी


सीजेपी कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा कि उनका विरोध किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर है। उनका कहना है कि यदि संगठन लोकतंत्र की बात करता है, तो उसकी आंतरिक व्यवस्था में भी पारदर्शिता होनी चाहिए। ब्रह्मभट्ट के अनुसार, आंदोलन से जुड़े लोगों को बिना भेदभाव के अपनी बात रखने और निर्णय प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे धरने पर बने रहेंगे।


परिवारवाद के खिलाफ आवाज

परिवारवाद के खिलाफ आवाज


प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि आंदोलन की टीम में रिश्तेदारों और करीबी लोगों को शामिल करने की कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनका कहना है कि आंदोलन की शुरुआत से भाई-भतीजावाद और पक्षपात की कोई जगह नहीं रही। मनीष ब्रह्मभट्ट ने कहा कि आंदोलन के प्रमुख चेहरों और राज्यों से जुड़े प्रतिनिधियों से सलाह लेकर आगे की रणनीति तैयार की जानी चाहिए। उनके अनुसार, सभी स्वयंसेवकों को साथ लेकर चलना ही आंदोलन की विश्वसनीयता बनाए रख सकता है।


पारदर्शी टीम बनाने की मांग

पारदर्शी टीम बनाने की मांग


युवाओं ने स्पष्ट किया है कि वे तब तक अपना विरोध जारी रखेंगे, जब तक सभी राज्यों से जुड़े प्रतिनिधियों और आंदोलन के स्वयंसेवकों को उचित स्थान नहीं दिया जाता। उनका कहना है कि टीम का गठन खुला और लोकतांत्रिक तरीके से होना चाहिए। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, जवाबदेही तय करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में आंदोलन से जुड़े फैसलों को लेकर किसी विवाद का सामना न करना पड़े। फिलहाल, कोर कमेटी को लेकर असंतोष किस दिशा में बढ़ता है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।