☰
×

सीबीआई की कार्रवाई: ग्रेटर नोएडा PNB घोटाले में दो आरोपी गिरफ्तार

ग्रेटर नोएडा के पंजाब नेशनल बैंक में करोड़ों रुपये की हेराफेरी के मामले में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई की है। महिला कार्यालय सहायक दीपांशी और उसके सहयोगी आशुतोष कुमार पाठक को गिरफ्तार किया गया है। जांच में पता चला है कि ग्राहकों के खातों से अनधिकृत रूप से 10.24 करोड़ रुपये निकाले गए थे। इस मामले में तीन साल से चल रही हेराफेरी के चलते खाताधारक अपनी रकम वापस पाने की मांग कर रहे हैं। जानें इस घोटाले की पूरी कहानी और सीबीआई की कार्रवाई के बारे में।
 

PNB घोटाले का खुलासा


PNB Scam: ग्रेटर नोएडा के पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की सेक्टर-पाई शाखा में खाताधारकों के खातों से करोड़ों रुपये की हेराफेरी के मामले में सीबीआई ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की। जांच एजेंसी ने बैंक की शाखा में तैनात महिला कार्यालय सहायक (ऑफिस असिस्टेंट) दीपांशी और उसके एक निजी सहयोगी आशुतोष कुमार पाठक को गिरफ्तार किया है।


पुणे से गिरफ्तार आरोपी

सीबीआई ने तीन नवंबर को एक प्रेस विज्ञप्ति में दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि की। आशुतोष कुमार पाठक को महाराष्ट्र के पुणे से पकड़ा गया है। सीबीआई ने उसे पुणे की विशेष अदालत में पेश कर ट्रांजिट रिमांड भी प्राप्त कर लिया है। दोनों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर हेराफेरी से जुड़े अन्य लोगों और लेनदेन की जानकारी जुटाई जा रही है।


10.24 करोड़ की अवैध निकासी

सीबीआई के अनुसार, पंजाब नेशनल बैंक की ग्रेटर नोएडा स्थित पाई शाखा में ग्राहकों के विभिन्न खातों से अनधिकृत रूप से 10.24 करोड़ रुपये की रकम निकाली गई थी। आरोप है कि दीपांशी ने एक निजी व्यक्ति और अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिलकर इस रकम को खातों से निकालकर दूसरी जगह स्थानांतरित किया। बैंक खातों से बिना अधिकृत अनुमति के डेबिट ट्रांजैक्शन किए गए। इसी शिकायत के आधार पर सीबीआई ने 29 अक्तूबर 2026 को मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।


तीन साल से चल रही हेराफेरी

बैंक में हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद से खाताधारक लगातार अपनी रकम वापस मिलने की मांग कर रहे हैं। शिकायतों के अनुसार, ग्राहकों के बचत खातों और सावधि जमा (एफडी) से बिना जानकारी के रकम निकाली गई थी। कई खाताधारकों ने आरोप लगाया कि उनके मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी में भी बदलाव किया गया, जिससे खाते में होने वाले लेनदेन की जानकारी उन तक नहीं पहुंच सकी।


रकम वापसी की प्रक्रिया शुरू

शुरुआती शिकायतों में हेराफेरी का दायरा 35 करोड़ रुपये से अधिक होने का दावा किया गया था, जबकि सीबीआई की ओर से दर्ज मामले में 10.24 करोड़ रुपये की रकम का उल्लेख है। खाताधारकों का आरोप है कि यह गड़बड़ी करीब तीन साल तक चलती रही। मामले के उजागर होने के बाद से बैंक प्रबंधन ने प्रभावित खाताधारकों की रकम वापस करने की प्रक्रिया शुरू की है।