सीबीआई की छापेमारी: चंडीगढ़ और लुधियाना में 504 करोड़ के गबन का मामला
सीबीआई की कार्रवाई
चंडीगढ़/लुधियाना: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने चंडीगढ़ नगर निगम और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) के बैंक खातों से सरकारी धन के गबन के मामले में गुरुवार को चंडीगढ़ और लुधियाना में एक साथ कई स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान जांच एजेंसी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य अपने कब्जे में लिए हैं।
तलाशी के स्थान
सीबीआई ने कुल पांच स्थानों पर तलाशी ली, जिसमें गबन की गई राशि के लाभार्थियों के आवास और व्यापारिक प्रतिष्ठान, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अधिकारी अनुभव मिश्रा का ठिकाना और जांच से जुड़े निजी संस्थानों के परिसर शामिल थे।
महत्वपूर्ण सबूत
छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी को कई महत्वपूर्ण सबूत मिले, जिनमें डिजिटल स्टोरेज ड्राइव, डिजिटल सिग्नेचर, संपत्ति से संबंधित दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड, विभिन्न इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं। इन दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है।
मामले का इतिहास
सीबीआई ने बताया कि यह मामला पहले हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पास था, लेकिन राज्य सरकार के अनुरोध पर इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई।
बैंकिंग घोटाला
जांच एजेंसी के अनुसार, यह मामला आईडीएफसी फर्स्ट बैंक की सेक्टर-32, चंडीगढ़ शाखा से जुड़े एक बड़े बैंकिंग घोटाले का हिस्सा है। आरोप है कि हरियाणा सरकार के आठ विभागों के लगभग 504 करोड़ रुपए सरकारी धन को फर्जी या अस्तित्वहीन फिक्स्ड डिपॉजिट और धोखाधड़ी वाले डेबिट लेनदेन के माध्यम से निकालकर शेल कंपनियों के जरिए इधर-उधर भेज दिया गया।
चार्जशीट और अन्य मामले
सीबीआई ने अब तक 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के छह बैंक अधिकारी, हरियाणा सरकार के तीन कर्मचारी, दो कंपनियां और छह व्यक्ति शामिल हैं।
इसके अलावा, सीबीआई ने चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश से जुड़े दो अन्य मामलों की भी जांच की है। इनमें से एक मामला चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और नगर निगम चंडीगढ़ से संबंधित है, जबकि दूसरा मामला चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसाइटी से जुड़ा है।
जिम्मेदारी और जांच
सीबीआई ने कहा कि वह इस पूरे मामले में शामिल सभी जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही, गबन किए गए सार्वजनिक धन की पूरी श्रृंखला का पता लगाकर अपराध से अर्जित राशि को ट्रेस करने की दिशा में जांच लगातार जारी रहेगी।