सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली पर विवाद: छात्रों की चिंताएं बढ़ीं
सीबीएसई की मार्किंग प्रणाली पर उठे सवाल
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली विवादों में घिर गई है। छात्रों, उनके अभिभावकों और विपक्षी दलों ने इस पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। 12वीं कक्षा के छात्रों ने बड़ी संख्या में उत्तर पुस्तिकाओं में बदलाव, पोर्टल के क्रैश होने और धुंधली उत्तर शीट की शिकायत की है। यह मामला तब और गंभीर हो गया जब लगभग 4 लाख 4 हजार छात्रों ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी मांगी।
छात्र का वायरल ब्लॉग
इस बीच, कक्षा 12 के छात्र सार्थक सिद्धांत का एक ब्लॉग तेजी से वायरल हो रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई विपक्षी नेताओं ने इस ब्लॉग को साझा किया है। इस ब्लॉग में छात्र ने ओएसएम अनुबंध से संबंधित टेंडर दस्तावेजों की जांच की है। छात्र का आरोप है कि टेंडर की शर्तों में कई बार बदलाव किया गया है, जिससे हैदराबाद की कोएम्प्ट एडुटेक कंपनी को फायदा हुआ है।
छात्र ने 15 कमियों की पहचान की
सार्थक सिद्धांत ने कहा, 'मैंने एक ब्लॉग लिखा है जिसमें मैंने सीबीएसई के टेंडर दस्तावेजों की तुलना की है। इसमें कम से कम 15 कमियां थीं, जिनमें से मैं कुछ को उजागर करना चाहता हूं।' उन्होंने बताया कि Coempt का बैकग्राउंड संदिग्ध रहा है, और इसे पहले Globarena के नाम से जाना जाता था।
आरएफपी में खामियां
छात्र ने आगे कहा, 'Coempt के कारण 23 छात्रों ने आत्महत्या की थी। अब मैं आरएफपी (Request for Proposal) के बारे में बताना चाहता हूं। सरकार एक टेंडर जारी करती है और बोली लगाने वालों से बोली लगाने को कहती है। सीबीएसई ने यह टेंडर तीन बार जारी किया, और मैंने पुराने और नए आरएफपी की तुलना की, जिसमें कुछ खामियां मिलीं।'
खराब प्रदर्शन से जुड़े क्लॉज में बदलाव
उन्होंने कहा, 'पहली कमी यह है कि खराब प्रदर्शन से जुड़े तीन क्लॉज को नए आरएफपी से हटा दिया गया है। पहले के आरएफपी में एक क्लॉज था जिसे 'पहले ब्लैकलिस्टेड' कहा गया था, जबकि नए में इसे 'अभी ब्लैकलिस्टेड' कर दिया गया है।'
प्रोजेक्ट मानदंडों में बदलाव
सार्थक ने कहा, 'बोर्ड ऐसे सेवा प्रदाता को क्यों चुनेगा जो पहले ब्लैकलिस्टेड रहा हो? तीसरी बात यह है कि 50 करोड़ की लिमिट को क्वालिफाई करना जरूरी था, और Coempt ने इसे 1.7 प्रतिशत से क्वालिफाई किया। भ्रष्टाचार से संबंधित गतिविधियों के लिए तय समय-सीमा को आधा कर दिया गया और प्रोजेक्ट के मानदंडों में भी बदलाव किए गए। इससे यह स्पष्ट होता है कि टीसीएस जैसी बड़ी कंपनी को प्राथमिकता नहीं दी गई, बल्कि Coempt को तरजीह दी गई।'
ओएसएम प्रणाली का परिचय
पहले, सीबीएसई छात्रों की कॉपियों को बंडल बनाकर जांचने के लिए भेजता था, जहां शिक्षक हाथ से हर कॉपी की जांच करते थे। लेकिन ओएसएम प्रणाली में सभी कॉपियों को स्कैन किया जाता है, और फिर कंप्यूटर पर देखकर शिक्षक अंक देते हैं।