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सुखबीर सिंह बादल पर हमले की एनआईए जांच की मांग, हरसिमरत कौर ने उठाई आवाज़

सुखबीर सिंह बादल पर हुए जानलेवा हमले की जांच की मांग उठाई गई है। हरसिमरत कौर ने केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर एनआईए से जांच कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने हमले के पीछे की साजिश और पंजाब पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जानें इस मामले में क्या हुआ और आगे की कार्रवाई क्या होगी।
 

सुखबीर सिंह बादल पर जानलेवा हमला

नई दिल्ली - शिरोमणि अकाली दल के नेता और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर 13 अगस्त को हुए जानलेवा हमले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से कराने की मांग की गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर इस मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की अपील की है। उन्होंने 4 दिसंबर 2024 को हुए पहले हमले का भी जिक्र किया। सुखबीर सिंह बादल के बाजू पर लगे टांकों की पहली तस्वीर भी सामने आई है, जिसे उनकी पत्नी ने साझा किया। उन्होंने बताया कि 150 से अधिक टांके लगे हैं।


हरसिमरत कौर ने कहा कि नांदेड़ साहिब में गुरु घर में मत्था टेकने के बाद एक हमलावर ने तलवार से सुखबीर पर हमला किया, जिसका उद्देश्य उनकी हत्या करना था। इस हमले में सुखबीर के दाहिने हाथ में चोट आई, और उन्हें बचाने की कोशिश कर रहे एक सुरक्षाकर्मी भी घायल हो गए। हरसिमरत ने बताया कि यह कोई अलग घटना नहीं है, क्योंकि इससे पहले 4 दिसंबर 2024 को भी सुखबीर पर अमृतसर में हमला हुआ था। उन्होंने दोनों घटनाओं में समानताएं बताते हुए आशंका जताई कि ये हमले आपस में जुड़े हो सकते हैं।


हरसिमरत कौर ने कहा कि हमलावर ने डेढ़ फीट की किरच से वार किया, लेकिन हाथ आगे आने से किरच हाथ से आर-पार हो गई। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस मामले की जांच एनआईए को सौंपने की मांग की है, क्योंकि इसके पीछे एक साजिश हो सकती है।


पत्र में पंजाब पुलिस और राज्य सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। हरसिमरत कौर ने कहा कि 2024 में हुए पहले हमले के आरोपी के उग्रवादी संबंधों की जानकारी होने के बावजूद उसे हरमंदिर साहिब परिसर में स्वतंत्र रूप से घूमने दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि हमले से पहले कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और आरोपी के बीच करीबी संबंधों के सबूत मिले हैं, जिससे पुलिस की लापरवाही या मिलीभगत का संदेह होता है।


सांसद ने पत्र में चिंता जताई कि राजनीतिक और धार्मिक आधार पर हिंसा को सामान्य बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि गुरु घरों जैसी पवित्र स्थलों पर बार-बार होने वाली हिंसक घटनाएं सिख समुदाय की भावनाओं को आहत करती हैं और पंजाब तथा देश की छवि को नुकसान पहुंचा सकती हैं। हरसिमरत कौर ने गृह मंत्री से आग्रह किया कि दोनों घटनाओं की एनआईए द्वारा जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या ये हमले किसी बड़े षड्यंत्र का हिस्सा थे।


पत्र के अंत में उन्होंने कहा कि पंजाब और देश को 1980 और 1990 के दशक जैसे हिंसक दौर की पुनरावृत्ति का जोखिम नहीं उठाना चाहिए। इसलिए राजनीतिक या धार्मिक प्रेरित हिंसा के प्रति शून्य सहिष्णुता अपनाना आवश्यक है।