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सुप्रीम कोर्ट का आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश बरकरार

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और अन्य क्षेत्रों में आवारा कुत्तों को हटाने के अपने आदेश को बरकरार रखा है। अदालत ने खतरनाक कुत्तों को इंजेक्शन से मारने की अनुमति दी है, यह कहते हुए कि लोगों की सुरक्षा प्राथमिकता है। सभी याचिकाएं खारिज कर दी गई हैं, और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे पुनर्वास और नसबंदी के आदेशों का पालन करें। जानें इस महत्वपूर्ण निर्णय के बारे में और क्या है अदालत का अगला कदम।
 

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली और अन्य क्षेत्रों में आवारा कुत्तों को सड़कों से हटाने के अपने पूर्व आदेश को बदलने से इनकार कर दिया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि खतरनाक या रेबीज से संक्रमित कुत्तों को इंजेक्शन के माध्यम से समाप्त किया जा सकता है। न्यायालय ने कहा कि लोगों की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है और कुत्तों के खतरे से मुक्त रहने का अधिकार भी आवश्यक है।


याचिकाओं का खारिज होना

मंगलवार को सर्वोच्च अदालत ने इस मामले पर अंतिम निर्णय सुनाया और आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश के खिलाफ दायर सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि आवारा कुत्तों के पुनर्वास और नसबंदी के लिए दिए गए निर्देश नवंबर 2025 से लागू होंगे। इसके साथ ही, जो अधिकारी इन निर्देशों का पालन नहीं करेंगे, उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।


पुनर्वास और नसबंदी के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में सार्वजनिक स्थानों जैसे स्कूलों, अस्पतालों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाने के लिए निर्देश जारी किए थे। अदालत ने यह भी कहा था कि कुत्तों को पकड़ने के बाद, उन्हें नसबंदी और टीकाकरण के बाद वहीं नहीं छोड़ा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें शेल्टर होम्स में रखा जाना चाहिए। इसके अलावा, सड़कों पर कुत्तों को खाना खिलाने पर भी प्रतिबंध लगाया गया था। इसके बाद कई डॉग लवर्स और एनजीओ ने इन निर्देशों को रद्द कराने के लिए याचिकाएं दायर की थीं, जिन्हें अदालत ने खारिज कर दिया है।