सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: दो से अधिक बच्चों के कानून की प्रासंगिकता समाप्त
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने मंगला भीमराव इंगल बनाम एडिशनल कमिश्नर, अमरावती मामले में मंगलवार को यह निर्णय सुनाया कि दो से अधिक बच्चों के होने पर स्थानीय निकाय चुनाव में भाग लेने से रोकने वाले कानून अब अप्रासंगिक हो चुके हैं। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की बेंच ने 2003 के जावेद बनाम हरियाणा सरकार के फैसले पर पुनर्विचार के लिए मामला बड़ी बेंच को भेजा। उस समय की तीन जजों की बेंच ने हरियाणा पंचायती राज अधिनियम 1994 की दो बच्चों की शर्त को मान्यता दी थी।
प्रजनन दर में गिरावट
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय का आधार देश की घटती प्रजनन दर को बताया है। कोर्ट ने बताया कि कुल प्रजनन दर 2003 में 3 थी, जो अब घटकर 1.9 हो गई है। यह दर 2.1 के रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे है, जो एक पीढ़ी के स्थान पर दूसरी पीढ़ी को लाने के लिए आवश्यक है।
मामले का विवरण
यह निर्णय महाराष्ट्र के काकोडा ग्राम पंचायत की पूर्व सरपंच मंगला भीमराव के मामले में दिया गया। उन्हें तीसरे बच्चे के जन्म के कारण महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम 1959 की धारा 14(1)(j-1) के तहत अयोग्य ठहराया गया था, जिसे कोर्ट ने रद्द कर दिया।
कोर्ट की चिंताएं
जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि ऐसे कानूनों का आधार केवल जनसंख्या वृद्धि का डर था। पिछले कुछ दशकों में जनसांख्यिकीय बदलावों के कारण जनसंख्या स्थिर हो गई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि देश की जनसंख्या अभी घट नहीं रही है। प्रजनन दर के रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे रहने पर भविष्य में बुजुर्गों की संख्या बढ़ेगी और कामकाजी उम्र के लोगों की संख्या घटेगी।
कानूनी प्रक्रिया में समय
सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त को इस मामले का निर्णय सुरक्षित रखा था। कोर्ट ने एमिकस क्यूरी रुक्मिणी बोबडे और याचिकाकर्ता के वकील प्रतीक बोम्बर्डे से दो से अधिक बच्चों पर रोक वाले राज्यों के कानूनों की सूची मांगी थी। रुक्मिणी बोबडे द्वारा प्रस्तुत सूची में बताया गया कि 7 राज्यों ने यह शर्त हटा दी है और 15 राज्यों में ऐसी कोई नीति नहीं है।
राज्यों में लागू शर्तें
जनसंख्या नियंत्रण के लिए असम, गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तराखंड में यह शर्त अब भी लागू है। सभी राज्यों में एक समान नियम नहीं हैं। कोर्ट ने द इकोनॉमिस्ट में भारत की घटती प्रजनन दर पर प्रकाशित लेख का भी उल्लेख किया।
भारत में जनसंख्या की स्थिति
भारत 2023 में चीन को पीछे छोड़कर दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन गया है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) में देश की कुल प्रजनन दर 2.0 दर्ज की गई है। 2019 से 2021 के बीच NFHS-5 में यह दर 2.0 थी।
प्रजनन दर में गिरावट का प्रभाव
हालांकि प्रजनन दर में गिरावट आई है, लेकिन इसका तात्कालिक प्रभाव जनसंख्या पर नहीं पड़ेगा। प्रजनन की उम्र वाली महिलाओं की संख्या अभी भी काफी है, जिसे जनसांख्यिकीय गति कहा जाता है। यह जनसंख्या वृद्धि में लगभग 70 प्रतिशत का योगदान देती है।