सुप्रीम कोर्ट का प्रदर्शन स्थलों पर अधिकारों पर महत्वपूर्ण निर्णय
प्रदर्शन स्थलों का उपयोग
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक याचिका की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि किसी भी प्रदर्शन स्थल पर किसी का स्थायी अधिकार नहीं होता है। अदालत ने कहा कि प्रदर्शन स्थलों का उपयोग केवल एक निश्चित समय के लिए किया जा सकता है और इन्हें अन्य लोगों के लिए भी खाली छोड़ना आवश्यक है। जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शनों से संबंधित याचिका पर सुनवाई की।
प्रदर्शन का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'आप किसी एक स्थान पर हमेशा नहीं रह सकते हैं। अन्य प्रदर्शनकारी भी हैं। किसानों, श्रमिकों और बेघरों के लिए भी प्रदर्शन का स्थान होना चाहिए। सभी को अपने अधिकारों का उपयोग करने का मौका मिलना चाहिए।'
मजदूरों पर प्रभाव
कोर्ट ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान मजदूरों को होने वाले नुकसान का भी उल्लेख किया। CJI सूर्यकांत ने कहा, 'विरोध प्रदर्शन का अधिकार संवैधानिक है, जैसे व्यापार करने का अधिकार। हमें दिहाड़ी मजदूरों की आजीविका की चिंता है।'
व्यापारियों की चिंताएं
सीनियर अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने व्यापारियों की ओर से कहा कि प्रदर्शनों के कारण 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि रामलीला मैदान, जो कनॉट प्लेस से केवल 1 मील की दूरी पर है, वहां 50 लाख से अधिक लोग रहते हैं।
प्रदर्शन के खिलाफ तर्क
वकीलों ने यह भी तर्क दिया कि त्योहारों के समय प्रदर्शनों के कारण व्यापारियों को भारी नुकसान होता है। जस्टिस बागची ने पूछा कि क्या केवल प्रदर्शनकारियों को ही नुकसान का जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जबकि सरकार भी सड़कों पर बैरिकेडिंग करती है।
निजता का मुद्दा
वकीलों ने कहा कि रामलीला मैदान प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान है, लेकिन जंतर मंतर पहले ही स्थानांतरित हो चुका है। प्रशांत भूषण ने निजता का मुद्दा उठाया, जिस पर अदालत ने कहा कि सार्वजनिक स्थान पर खड़े होकर निजता की उम्मीद नहीं की जा सकती।