सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सीजेपी के सभी एफआईआर रद्द
सीजेपी आंदोलन से जुड़े एफआईआर का रद्द होना
नई दिल्ली में जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन से संबंधित सभी एफआईआर को रद्द कर दिया गया है। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विशेष शक्तियों का उपयोग करते हुए लिया। आंदोलन समाप्त होने के 38 दिन बाद, सर्वोच्च अदालत ने यह आदेश दिया। इसके साथ ही, अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि वह उन छात्रों के परिजनों को तीन महीने के भीतर मुआवजा प्रदान करे, जिन्होंने नीट यूजी परीक्षा रद्द होने के कारण आत्महत्या की थी।
सीजेपी की मांगे पूरी, मार्च रद्द
सीजेपी के आंदोलन की तीन प्रमुख मांगें पूरी हो गई हैं। पहले, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया। अब, सभी एफआईआर रद्द हो गए हैं और मुआवजे का आदेश भी जारी किया गया है। इसके चलते, सीजेपी ने 5 सितंबर को इंडिया गेट से प्रस्तावित मार्च को रद्द करने का निर्णय लिया। सीजेपी ने सरकार पर आरोप लगाया था कि उसने 25 जुलाई को किए गए वादे को पूरा नहीं किया।
पुलिस की कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
पुलिस ने पहले इस मार्च को रोकने का प्रयास किया था। सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी, जिसमें 12 और 13 सितंबर को दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन के कारण प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद, दिल्ली पुलिस ने सभी एफआईआर रद्द करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की। सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले का उल्लेख करते हुए सुनवाई की।
सरकार का बयान
फैसले के बाद, सरकार ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान 2,873 लोग आपराधिक रिकॉर्ड के साथ वहां उपस्थित थे। जिन लोगों ने हिंसा या संपत्ति को नुकसान पहुँचाया, उनके खिलाफ मामले जारी रहेंगे। इसके अलावा, 20 से 25 जुलाई के बीच हुए विरोध प्रदर्शनों से संबंधित कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, बंगाल और असम में आपराधिक रिकॉर्ड वाले व्यक्तियों पर मामले चलते रहेंगे, जबकि अन्य राज्यों में ऐसी एफआईआर में पुलिस न तो जांच आगे बढ़ाएगी और न ही कोई कार्रवाई करेगी।