सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: कार में मौत को केवल दुर्घटना नहीं माना जा सकता
कोर्ट का निर्णय
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुआवजे का दावा तभी मान्य होगा जब यह सिद्ध हो कि वाहन के उपयोग और मृत्यु के बीच एक स्पष्ट कानूनी संबंध था।
सुप्रीम कोर्ट, नई दिल्ली: किसी व्यक्ति की कार में हुई मृत्यु को केवल वाहन की उपस्थिति के आधार पर मोटर वाहन दुर्घटना नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि मुआवजा तभी मिलेगा जब वाहन और मृत्यु के बीच कानूनी दृष्टिकोण से स्वीकार्य संबंध स्थापित किया जाए। यदि ऐसा संबंध नहीं होता है, तो वाहन के मालिक और बीमा कंपनी पर कोई दायित्व नहीं बनता।
छत्तीसगढ़ के बिजनेसमैन आनंद का मामला
यह मामला छत्तीसगढ़ के एक बिजनेसमैन आनंद की मृत्यु से संबंधित है, जिन्हें आखिरी बार 29 नवंबर 2009 को उनके मित्र दिलीप अग्रवाल द्वारा चलायी जा रही कार में देखा गया था। तीन दिन बाद, आनंद का शव छत्तीसगढ़ के बिनजकोट गांव के पास मिला। उनके परिवार ने दावा किया कि मृत्यु वाहन के उपयोग के कारण हुई थी, जिससे वाहन के मालिक और बीमाकर्ता मुआवजे के लिए जिम्मेदार हैं। इसलिए, उन्होंने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 166 के तहत मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण में लगभग 26 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की।
हाईकोर्ट का आदेश
मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 165 और 166 के तहत दावे को स्वीकार किया और दिलीप को ब्याज सहित 5.64 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।
जब मामला उच्च न्यायालय में पहुंचा, तो अदालत ने इन निर्णयों की पुष्टि करते हुए मुआवजे की राशि को बढ़ाकर 8.60 लाख रुपये कर दिया, जिसमें ब्याज भी शामिल था। अंततः, दिलीप ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। मुख्य मुद्दा यह था कि क्या आनंद की मृत्यु को मोटर वाहन के उपयोग से उत्पन्न माना जा सकता है, जिससे मोटर वाहन अधिनियम के तहत दायित्व बनता हो।
सुप्रीम कोर्ट का पलटा फैसला
सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति आॅगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने की। अदालत ने कहा कि मोटर व्हीक्ल एक्ट के तहत मुआवजा पाने के लिए केवल वाहन का घटनास्थल पर होना पर्याप्त नहीं है।
एक्सीडेंटल क्लेम में सख्ती की आवश्यकता
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि एक्सीडेंट क्लेम के मामलों में पुलिस केस जैसी सख्त जांच की आवश्यकता नहीं होती है, जहां हर बात को 100 फीसदी साबित करना पड़ता है। क्लेम ट्रिब्यूनल में संभावनाओं के आधार पर निर्णय लिया जाता है। हालांकि, क्लेम मांगने वाले परिवार को यह साबित करना होगा कि हादसे और वाहन के उपयोग के बीच कोई न कोई सीधा संबंध जरूर था।