सुप्रीम कोर्ट का हाई-पावर्ड कमेटी को महत्वपूर्ण निर्देश, एक महीने में रिपोर्ट पेश करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश
दिल्ली में छात्रों के विरोध प्रदर्शन से संबंधित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाई-पावर्ड कमेटी को एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि कमेटी को एक महीने के भीतर अपनी प्रारंभिक तथ्य खोज रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इस बीच, मेघालय के पूर्व डीजीपी डॉ. एलआर बिश्नोई ने इस कमेटी से इस्तीफा दे दिया है, जिसे मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने स्वीकार कर लिया है।
कमेटी का गठन और कार्य
18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी का गठन किया था। इसका उद्देश्य नीट परीक्षा में धांधली के खिलाफ दिल्ली में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों की ज्यादती और हिंसा के आरोपों की जांच करना है। इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट दो सप्ताह बाद सुनवाई करेगा।
काम में देरी नहीं होनी चाहिए
अनिश्चित काल के लिए काम टालना उचित नहीं: सुप्रीम कोर्ट
गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में पीठ ने स्पष्ट किया कि कमेटी को और शिकायतों का इंतजार करते हुए अपना काम अनिश्चित काल के लिए नहीं टालना चाहिए। कमेटी पहले से मौजूद सामग्री पर काम शुरू कर सकती है और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांग सकती है।
साक्ष्य और शिकायतें प्रस्तुत करने का निर्देश
कमेटी को वीडियो और सबूत भेजें
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं और अन्य संबंधित व्यक्तियों के वकीलों से कहा है कि वे अपने पास मौजूद शिकायतें, वीडियो और अन्य सबूत कमेटी को भेजें। अदालत ने यह भी बताया कि याचिकाकर्ताओं के दावों और कमेटी तक पहुंची सामग्री में अंतर है।
कमेटी की संरचना
हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी में कौन-कौन?
इस कमेटी के अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी हैं। अन्य सदस्यों में पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस शलिंदर कौर, पूर्व सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के सेवानिवृत्त डीजीपी एलआर बिश्नोई शामिल हैं।