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सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में कुत्तों के व्यवहार पर चर्चा

सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मामलों पर सुनवाई के दौरान जस्टिस नाथ ने कहा कि कुत्ते इंसानों का डर पहचानते हैं, इसलिए काटते हैं। इस पर वकीलों के बीच बहस हुई, जिसमें कुत्तों को हटाने के संभावित परिणामों पर चर्चा की गई। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी वकील एक महत्वपूर्ण लेख पढ़कर आएं, जिस पर अगले दिन बहस होगी। सुनवाई में देश में केवल 5 सरकारी शेल्टर की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की गई।
 

सुप्रीम कोर्ट में कुत्तों से संबंधित मामलों पर सुनवाई


सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों से संबंधित मामलों पर सुनवाई के दौरान, जस्टिस नाथ ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि कुत्ते इंसानों के डर को पहचान लेते हैं, इसलिए वे काटते हैं। यह सुनवाई गुरुवार को दूसरे दिन हुई, जिसमें ढाई घंटे तक चर्चा चली। जस्टिस नाथ ने कुत्तों के व्यवहार पर अपने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर यह बात कही।


सुनवाई के अंत में, जस्टिस मेहता ने सभी वकीलों को निर्देश दिया कि वे 29 दिसंबर को टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित एक लेख को पढ़कर आएं, जिस पर अगले दिन बहस होगी। उल्लेखनीय है कि इस मामले में पिछले सात महीनों में छह बार सुनवाई हो चुकी है। पिछले साल नवंबर में, सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों, अस्पतालों, और अन्य सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया था।


देश में केवल 5 सरकारी शेल्टर

याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि राज्यों द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों में नगर पालिकाओं द्वारा चलाए जा रहे शेल्टर की संख्या का उल्लेख नहीं किया गया है। देश में केवल 5 सरकारी शेल्टर हैं, जिनमें से प्रत्येक में 100 कुत्ते रह सकते हैं। इस स्थिति में हमें बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता है।


कुत्तों को हटाने पर चूहों की समस्या

सुनवाई के दौरान, एनिमल वेलफेयर के वकील सीयू सिंह ने कुत्तों को हटाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कुत्तों को हटाने से चूहों की आबादी बढ़ेगी। इस पर कोर्ट ने मजाक में कहा कि क्या हमें बिल्लियों को लाना चाहिए?