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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए गंभीर सवाल

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जल भुइयां ने जंतर-मंतर पर पुलिस द्वारा छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने पुलिस की विश्वसनीयता, हिरासत में हिंसा और छात्रों के अधिकारों पर भी विचार किया। जस्टिस भुइयां का कहना है कि पुलिस को संविधान का पालन करते हुए निष्पक्षता से कार्य करना चाहिए। यह मुद्दा न केवल कानून व्यवस्था के लिए, बल्कि समाज के लिए भी महत्वपूर्ण है।
 

पुलिस बल के खिलाफ चिंता व्यक्त करते हुए


सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश उज्जल भुइयां ने जंतर-मंतर पर जुलाई में छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इसे एक गंभीर मुद्दा बताया है।


पुलिस की विश्वसनीयता पर सवाल

पूर्व सुरक्षा सचिव यशोवर्धन आजाद की पुस्तक विमोचन समारोह में बोलते हुए, जस्टिस भुइयां ने कहा कि युवा आईपीएस अधिकारियों द्वारा प्रदर्शनकारियों के साथ हिंसा करना अत्यंत दुखद है। उन्होंने कहा कि पुलिस को कानून का पालन कराने में बिना किसी अतिरिक्त बल का प्रयोग करना चाहिए।


संवैधानिक मर्यादा का पालन आवश्यक

जस्टिस भुइयां ने यह भी कहा कि पुलिस आम जनता के लिए राज्य का चेहरा होती है। पुलिस अपनी प्रतिष्ठा तभी बनाए रख सकती है जब वह संविधान का पालन करे, निष्पक्षता से कार्य करे और ईमानदारी तथा धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांतों का पालन करे।


VIDEO | New Delhi: "Police personnel assaulting protesters is distressing; it is a matter of grave concern," says Justice Ujjal Bhuyan on police action at Jantar Mantar, at the release of retired IPS officer Yashovardhan Azad's book 'Policing the Republic'. pic.twitter.com/BSF0qdY3Nn

— Press Trust of India (@PTI_News) September 4, 2026



हिरासत में हिंसा पर चिंता

उन्होंने देश में हिरासत में दी जाने वाली यातनाओं और मौतों पर भी चिंता व्यक्त की। इसे एक सभ्य समाज का सबसे बड़ा अपराध मानते हुए, उन्होंने पुलिस व्यवस्था में सुधार और राजनीतिक हस्तक्षेप को रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया।


छात्रों के अधिकारों की रक्षा

कुछ दिन पहले एनएलयू दिल्ली के दीक्षांत समारोह में जस्टिस भुइयां ने कहा था कि छात्रों को सवाल पूछने या अलग राय रखने पर दंडित करने की धमकी देना असंवैधानिक है। यह सत्ता का दुरुपयोग है।