सुप्रीम कोर्ट ने CJP के प्रदर्शन से जुड़ी FIR खारिज की
सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट रुख
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों से संबंधित प्राथमिकियों (FIR) के मामले में एक बार फिर स्पष्ट और संवेदनशील रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए इसे खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि यह याचिका वास्तव में पहले के फैसले को चुनौती देने और पुनर्विचार कराने का प्रयास है।
सीजेआई का बयान
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा- 'युवा छात्रों को कोर्ट-कचहरी के चक्कर में नहीं उलझा सकते'
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष पीठ ने एल. रमानाथन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि पुलिस की कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ा संदेश भेजना जरूरी है।
सीजेआई की मानवीय टिप्पणी
इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, 'आप कह रहे हैं कि हमें अनुच्छेद 142 का उपयोग करके एफआईआर रद्द नहीं करनी चाहिए थी! ये युवा छात्र हैं, हमें उनके भविष्य और उनके माता-पिता का ध्यान रखना है। हम नहीं चाहते कि वे मुकदमों में उलझें।'
अदालत का पिछला आदेश
अदालत ने हिमाचल प्रदेश में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान जनप्रतिनिधियों और आम लोगों के विरोध प्रदर्शनों पर दिए गए पिछले आदेशों का हवाला दिया, जहां गैर-आपराधिक मामलों में दर्ज मुकदमे जनहित में रद्द कर दिए गए थे।
याचिका खारिज
पीठ ने याचिकाकर्ता से कहा- 'हमारे पुराने आदेश को देखें'
पीठ ने याचिकाकर्ता के वकील को स्पष्ट रूप से कहा कि आपके मुवक्किल को सुप्रीम कोर्ट का पूर्व आदेश ध्यान से पढ़ना चाहिए। जब शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत असाधारण शक्तियों का प्रयोग करते हुए पहले ही एफआईआर निरस्त कर दी है, तो उसी मुद्दे को दोबारा उठाना उचित नहीं है।
नीट पेपर लीक का विवाद
यह विवाद नीट (NEET) पेपर लीक मामले में तत्कालीन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी द्वारा जंतर-मंतर पर किए गए प्रदर्शन से शुरू हुआ था। 20 जुलाई को 'संसद चलो मार्च' के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज किए थे। बाद में छात्रों के हित में सुप्रीम कोर्ट ने सभी एफआईआर को रद्द कर दिया। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर फिर से प्रदर्शन की तैयारी कर रहा है।