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सुप्रीम कोर्ट ने RTI कार्यकर्ता को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार

सुप्रीम कोर्ट ने RTI कार्यकर्ता राकेश कुमार बहल की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि RTI का उपयोग अब 'नया धंधा' बनता जा रहा है। बहल और उनके सहयोगी पर आरोप है कि उन्होंने सड़क निर्माण कार्य में बाधा डाली। हाईकोर्ट ने पहले ही उनकी जमानत याचिका को खारिज कर दिया था। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा।
 

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

सड़क निर्माण में बाधा डालने के आरोप में एक RTI कार्यकर्ता को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। सर्वोच्च न्यायालय ने अग्रिम जमानत देने से मना करते हुए RTI के उपयोग पर कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत आवेदन देना अब 'नया धंधा' बनता जा रहा है।


मामले की पृष्ठभूमि

RTI कार्यकर्ता राकेश कुमार बहल और उनके सहयोगी ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्णय को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने पहले ही उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।


सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणियाँ

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी


सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने RTI कार्यकर्ता की सड़क निर्माण कार्य की निगरानी में भूमिका पर सवाल उठाए। न्यायमूर्ति मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार ने सड़क निर्माण के लिए धन जारी किया है और संबंधित विभाग इसके लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा, 'RTI आवेदन देना अब एक नया धंधा बन गया है। सड़क निर्माण की निगरानी करना आपका काम नहीं है।' न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई ने भी पूछा कि उन्हें सड़क निर्माण कार्यों की निगरानी करने का अधिकार किसने दिया है।


मामले का विवरण

क्या है पूरा मामला?


FIR के अनुसार, पंजाब के गुरदासपुर जिले के बटाला में चल रहे सड़क निर्माण कार्य के दौरान राकेश कुमार बहल और उनके सहयोगी पर सरकारी काम में बाधा डालने का आरोप है। शिकायत में कहा गया है कि दोनों ने निर्माण कार्य की देखरेख कर रहे व्यक्ति को धमकाया और वहां काम कर रहे मजदूरों को भी डराने का प्रयास किया। इसके अलावा, शिकायतकर्ता के साथ मारपीट और अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप भी लगाया गया है। इसी आधार पर आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC/ST) अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया गया।


हाई कोर्ट का निर्णय

हाई कोर्ट ने भी नहीं दी थी राहत


पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने 14 मई को दिए अपने आदेश में कहा था कि FIR में लगाए गए आरोप गंभीर हैं। अदालत ने यह भी माना कि सरकारी कामकाज में रुकावट डालने के मामले में आरोपियों की भूमिका स्पष्ट है। इसी कारण हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत की मांग को ठुकरा दिया था।


भ्रष्टाचार का आरोप

भ्रष्टाचार उजागर करने का किया दावा


सुप्रीम कोर्ट में बहल के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को झूठे मामले में फंसाया गया है। उनका कहना था कि बहल सड़क निर्माण में कथित भ्रष्टाचार को उजागर कर रहे थे, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को मानने से इनकार कर दिया और जमानत याचिका खारिज कर दी। इस निर्णय के बाद अब आरोपियों को मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा।