सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर पर बीसीसीआई के प्रतिबंध को हटाया
अनुराग ठाकुर को मिली बड़ी राहत
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय जनता पार्टी के नेता, हिमाचल प्रदेश के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर पर बीसीसीआई में पद ग्रहण करने पर लगे प्रतिबंध को समाप्त कर दिया है। अब अनुराग ठाकुर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पदाधिकारी के रूप में कार्य कर सकेंगे।
ठाकुर को 2017 में लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों का पालन न करने के कारण पद से हटा दिया गया था। इस कमेटी के नियमों में आयु सीमा और सरकारी पदों से संबंधित कई कड़े प्रावधान शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय भारतीय क्रिकेट के प्रशासनिक ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने अनुराग ठाकुर पर बीसीसीआई में पद ग्रहण करने पर लगे प्रतिबंध को हटाते हुए 2017 में पारित अपने आदेश में संशोधन किया है। अब वे बीसीसीआई से संबंधित कार्यों और बैठकों में भाग ले सकेंगे।
इस आदेश के तहत अनुराग ठाकुर को बीसीसीआई की आंतरिक गतिविधियों से दूर रहने का निर्देश दिया गया था। जब 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने उन पर प्रतिबंध लगाया था, तब वे बीसीसीआई के अध्यक्ष थे। उस समय की बेंच ने उन्हें बीसीसीआई की गतिविधियों से दूर रहने का आदेश दिया था।
अब, मौजूदा चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच ने उस आदेश में संशोधन किया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉय माल्य बागची की बेंच ने अनुराग ठाकुर को बीसीसीआई के आंतरिक और प्रशासनिक मामलों में भाग लेने की अनुमति दे दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जनवरी 2017 में लगाया गया प्रतिबंध आजीवन अयोग्यता के रूप में नहीं था। कोर्ट ने कहा कि उनका इरादा आजीवन प्रतिबंध लगाने का नहीं था और यह उचित भी नहीं है। अनुराग ठाकुर ने पहले ही बिना शर्त माफी मांग ली थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था।