सुप्रीम कोर्ट ने अवैध निर्माण पर प्रशासन को लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट की कड़ी चेतावनी
दिल्ली और उसके आसपास के क्षेत्रों में अवैध निर्माण के मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस शील नागू की पीठ ने कहा कि अधिकारी केवल खानापूर्ति कर रहे हैं। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि हर बार बिल्डरों पर कार्रवाई की जाती है, जबकि उन अधिकारियों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता जो इस स्थिति के लिए जिम्मेदार हैं।
अधिकारियों की लापरवाही पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली नगर निगम (MCD) के कार्यों पर गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि कई मामलों में उच्च न्यायालय की रोक के बावजूद अवैध निर्माण जारी रहा, जो अधिकारियों की मिलीभगत को दर्शाता है। हाल ही में साकेत में इमारत गिरने और मालवीय नगर तथा लखनऊ के अलीगंज में आग लगने की घटनाओं का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि इन हादसों में कई निर्दोष लोगों की जान गई, लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। साकेत में हुई घटना में छह लोगों की मृत्यु हुई थी, जहां नियमों का उल्लंघन करते हुए अतिरिक्त मंजिलें बनाई गई थीं।
IIT टीम का गठन
कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अब ऐसे आदेश पारित किए जाएंगे जो कई लोगों को प्रभावित करेंगे और अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा। जमीनी हकीकत का पता लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने IIT दिल्ली के दो वरिष्ठ प्रोफेसरों और दो ड्राफ्ट्समैन की एक विशेष निरीक्षण टीम बनाने का निर्देश दिया है। यह टीम दिल्ली के साकेत, लाजपत नगर, मालवीय नगर और लखनऊ के अलीगंज का दौरा कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इसके साथ ही कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से अवैध निर्माणों पर की गई कार्रवाई का पूरा विवरण भी मांगा है।