सुप्रीम कोर्ट ने आसाराम को अंतरिम जमानत देने से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने रेप के मामले में सजा भुगत रहे स्वयंभू संत आसाराम को फिलहाल अंतरिम जमानत देने से मना कर दिया है। हालांकि, अदालत ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्हें अपनी पसंद का एक प्रशिक्षित देखभालकर्ता 24 घंटे साथ रखने की अनुमति दी है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में उनकी तबीयत और बिगड़ती है, तो वे दोबारा अंतरिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।
AIIMS की रिपोर्ट पर आधारित सुनवाई
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने इस मामले की सुनवाई गुरुवार को की। इस दौरान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की 31 जुलाई 2026 की मेडिकल रिपोर्ट पर चर्चा की गई। रिपोर्ट में कहा गया कि आसाराम को अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उनकी देखभाल के लिए चौबीसों घंटे प्रशिक्षित चिकित्सा सहायता उपलब्ध रहनी चाहिए।
सॉलिसिटर जनरल का बयान
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि AIIMS की रिपोर्ट में दी गई सभी सिफारिशों का पालन किया जाएगा। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि आसाराम अपनी पसंद का एक प्रशिक्षित देखभालकर्ता रख सकते हैं, जो उनकी देखभाल करेगा। अदालत ने कहा कि यह व्यवस्था AIIMS की सलाह के अनुसार होगी और प्रशासन सभी आवश्यक सुविधाएं प्रदान करेगा।
आसाराम का पैरोल आवेदन
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने यह भी बताया कि आसाराम ने अदालत से एक महत्वपूर्ण तथ्य छिपाया है। उनके अनुसार, आसाराम ने पैरोल के लिए आवेदन किया था और राजस्थान हाई कोर्ट ने उन्हें 20 दिनों की पैरोल मंजूर की है। अदालत ने इस तथ्य को रिकॉर्ड में लिया, लेकिन फिलहाल अंतरिम जमानत देने से इनकार कर दिया।
2013 के दुष्कर्म मामले में सजा
आसाराम ने राजस्थान हाई कोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें 2013 के जोधपुर नाबालिग दुष्कर्म मामले में उनकी सजा को बरकरार रखा गया था। उन्होंने अपनी अपील लंबित रहने तक अंतरिम जमानत की मांग की थी। मई 2026 में राजस्थान हाई कोर्ट ने रेप और अन्य संबंधित धाराओं में उनकी सजा को बरकरार रखा था, लेकिन आपराधिक साजिश और गैंगरेप के आरोपों में पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर उन्हें उन आरोपों से बरी कर दिया गया था। वर्तमान में, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से इनकार करते हुए केवल उनकी चिकित्सा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षित देखभालकर्ता रखने की अनुमति दी है।