सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद की पुनर्विचार याचिका को किया खारिज
उमर खालिद की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
नई दिल्ली – सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद द्वारा दायर पुनर्विचार याचिका को अस्वीकार कर दिया है। इस याचिका में खालिद ने 5 जनवरी के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें 2020 के दिल्ली दंगों से संबंधित एक बड़े साजिश मामले में जमानत देने से मना किया गया था।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि पुनर्विचार के लिए कोई ठोस आधार नहीं है।
पीठ ने कहा कि पुनर्विचार याचिका और उसके साथ प्रस्तुत दस्तावेजों की समीक्षा के बाद, हमें 5 जनवरी 2026 के निर्णय पर पुनर्विचार करने का कोई उचित कारण नहीं मिला। इसीलिए, याचिका को खारिज किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका पर मौखिक सुनवाई के अनुरोध को भी अस्वीकार कर दिया। इससे पहले, 13 अप्रैल को उमर खालिद के वकील कपिल सिब्बल ने इस मामले का उल्लेख करते हुए खुली अदालत में सुनवाई की मांग की थी।
सिब्बल ने कहा था कि वह इस मामले में पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई के लिए खुली अदालत में जाने का अनुरोध कर रहे हैं। जस्टिस कुमार की पीठ ने कहा कि वे इस अनुरोध पर विचार करेंगे और आवश्यक होने पर इसे सुनवाई के लिए बुलाएंगे।
आमतौर पर, पुनर्विचार याचिकाओं पर सीमित आधारों पर निर्णय लिया जाता है और इन्हें खुली अदालत में सुनवाई के लिए बहुत कम ही सूचीबद्ध किया जाता है। इस वर्ष जनवरी में, सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में खालिद और सह-आरोपी शरजील इमाम को जमानत देने से मना कर दिया था।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने पांच अन्य आरोपियों को जमानत दी थी। जस्टिस कुमार की पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष की सामग्री से दोनों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है, जिस पर गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम की धारा 43डी(5) के तहत जमानत पर रोक लगती है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष की सामग्री और रिकॉर्ड पर मौजूद सबूत खालिद को जमानत पर रिहा करने का आधार नहीं बनाते हैं और यह दर्शाते हैं कि वह योजना बनाने और लोगों को जुटाने में शामिल था।