☰
×

सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात के मामले में पति के अधिकारों पर उठाए सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात की याचिका पर सुनवाई करते हुए पति के अधिकारों और वैवाहिक विवादों पर महत्वपूर्ण सवाल उठाए। महिला ने अपने पति पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है, जबकि पति ने बच्चे की देखभाल की जिम्मेदारी लेने का आश्वासन दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल वैवाहिक कलह गर्भपात का आधार नहीं हो सकता। अगली सुनवाई बुधवार को होगी, जिससे सभी की नजरें इस संवेदनशील मामले पर रहेंगी।
 

सुप्रीम कोर्ट में गर्भपात की याचिका पर सुनवाई

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक छह महीने से अधिक गर्भवती महिला द्वारा गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति मांगने वाली याचिका पर सुनवाई की। महिला ने अपने पति और ससुराल वालों पर दुर्व्यवहार के आरोप लगाते हुए गर्भपात की अनुमति मांगी है। इसके विपरीत, पति ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि अजन्मे बच्चे पर उसका भी अधिकार है और वह बच्चे के जन्म के बाद उसकी देखभाल करने के लिए तैयार है।


जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया कि केवल वैवाहिक विवाद गर्भावस्था समाप्त करने का आधार नहीं हो सकता। अदालत ने यह सवाल उठाया कि यदि वैवाहिक कलह के कारण गर्भपात की अनुमति दी जाने लगी, तो समाज की दिशा क्या होगी?


पीठ ने कहा कि बलात्कार या भ्रूण में गंभीर समस्याओं जैसे मामलों में गर्भपात की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन यह मामला उन स्थितियों से भिन्न है। अदालत ने यह भी कहा कि यह न तो यौन उत्पीड़न का मामला है और न ही किसी अकेली महिला की गर्भावस्था का।


महिला को समझाते हुए पीठ ने कहा कि पति-पत्नी के बीच मतभेद होना सामान्य है, लेकिन केवल इसी कारण गर्भावस्था समाप्त करने का निर्णय उचित नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने पिता के अधिकारों और अजन्मे बच्चे के भविष्य पर भी सवाल उठाए।


सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से याचिकाकर्ता महिला से बातचीत की। महिला ने स्पष्ट किया कि वह अपनी गर्भावस्था को जारी नहीं रखना चाहती और पति से तलाक लेना चाहती है।


पति ने अदालत को आश्वासन दिया कि बच्चे के जन्म के बाद वह उसकी देखभाल की पूरी जिम्मेदारी उठाएगा और गर्भपात की अनुमति नहीं देने की अपील की।


इस मामले में एक प्रमुख विवाद पति द्वारा पत्नी के चरित्र पर लगाए गए आरोप भी हैं। पीठ ने पति को सुलह के लिए पहल करने का सुझाव दिया और कहा कि यदि वह रिश्ते को सुधारना चाहता है, तो उसे पहले अदालत में हलफनामा दाखिल कर पत्नी पर लगाए गए सभी आरोप वापस लेने होंगे।


सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई जारी रखते हुए अगली सुनवाई के लिए बुधवार की तारीख तय की है। अब सभी की नजरें इस संवेदनशील मामले में अदालत के निर्णय पर रहेंगी।