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सुप्रीम कोर्ट ने गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने की याचिका को खारिज कर दिया है, यह कहते हुए कि यह मामला न्यायिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर विचार का विषय है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वे इस मुद्दे को प्रशासनिक स्तर पर उठाएं। सुनवाई के दौरान, चीफ जस्टिस ने नई बिल्डिंग के निर्माण का उल्लेख किया और कहा कि इस पर भविष्य में विचार किया जा सकता है। जानें इस महत्वपूर्ण निर्णय के पीछे की पूरी कहानी और आगे की प्रक्रिया के बारे में।
 

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय


कोर्ट ने कहा- यह मामला न्यायिक नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर विचार का विषय है
सुप्रीम कोर्ट ने गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने की याचिका को खारिज कर दिया है। यह याचिका बदरवाड़ा वेणुगोपाल द्वारा दायर की गई थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने इस पर सुनवाई की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला न्यायिक नहीं है, बल्कि प्रशासनिक स्तर पर विचार किया जाना चाहिए।


कोर्ट का आश्वासन

सुनवाई के दौरान, चीफ जस्टिस ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की नई बिल्डिंग का निर्माण चल रहा है और इस मुद्दे पर उस समय विचार किया जा सकता है। याचिकाकर्ता ने मौजूदा भवन पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने की मांग की थी। कोर्ट ने आश्वासन दिया कि इस पर विचार किया जाएगा, लेकिन ऐसे मामलों को याचिका के माध्यम से नहीं उठाना चाहिए।


प्रशासनिक अपील की सलाह

कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वे इस मामले को प्रशासनिक स्तर पर लिखित अपील के माध्यम से उठाएं। याचिकाकर्ता ने बताया कि उन्होंने मई 2025 में इस मुद्दे पर एक पत्र लिखा था, जिसका जवाब नवंबर 2025 में मिला था कि सुप्रीम कोर्ट अपना अलग प्रतीक उपयोग करता है।


नोट तैयार करने के निर्देश

चीफ जस्टिस ने कहा कि यह जवाब उनके कार्यकाल से पहले का है और अब इस पर विचार किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने सचिव जनरल को निर्देश दिया कि इस मामले पर एक नोट तैयार कर सक्षम प्राधिकारी के सामने रखा जाए। याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि यदि गुंबद पर राष्ट्रीय प्रतीक लगाने के लिए कोई वास्तु या संरचनात्मक व्यवस्था नहीं है, तो आवश्यक संस्थागत और तकनीकी कदम उठाए जाएं। इसके लिए लगभग 8 सप्ताह का समय सुझाया गया था।