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सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के मजिस्ट्रेट के खिलाफ जताई नाराजगी

सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा के एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश के बावजूद एक छात्र को नोटिस जारी करने पर सवाल उठाया। छात्र पर आरोप था कि वह सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के लिए छात्रों को भड़का रहा है। इस मामले में 5 लाख रुपये के बॉंड की मांग की गई थी, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। कोर्ट ने इस कार्रवाई को अवमानना मानते हुए ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से स्पष्टीकरण मांगा है। यह मामला NEET परीक्षा में कथित धांधली से जुड़ा है, जिसमें छात्रों ने 36 दिनों तक विरोध प्रदर्शन किया।
 

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी


सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ग्रेटर नोएडा के एक्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए थे, फिर भी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन में शामिल एक छात्र को नोटिस जारी किया गया। इस पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता में तीन जजों की पीठ ने सवाल उठाया कि मजिस्ट्रेट ने आदेश का उल्लंघन कैसे किया?


5 लाख रुपये के बॉन्ड की मांग

गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के द्वितीय वर्ष के छात्र अक्षत त्रिपाठी को 4 सितंबर को ग्रेटर नोएडा पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर नोटिस भेजा गया था। आरोप था कि वह छात्रों को सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के लिए उकसा रहा है। शांति व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर उससे 5 लाख रुपये के व्यक्तिगत बॉन्ड की मांग की गई थी, लेकिन बाद में पुलिस ने यह नोटिस वापस ले लिया।


अदालत के आदेश का उल्लंघन

वरिष्ठ वकील विश्वजीत भट्टाचार्य ने इस मामले को अदालत में उठाते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना बताया। उन्होंने कहा कि नोटिस वापस लेने से कोर्ट की अवमानना का मामला समाप्त नहीं होता। 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने CJP प्रदर्शनों में शामिल छात्रों पर दर्ज सभी FIR रद्द कर दी थीं और दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी थी।


स्पष्टीकरण की मांग

CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने अधिवक्ता को सभी तथ्यों और नोटिस को रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से लिखित स्पष्टीकरण मांगे जाने की बात कही है, क्योंकि युवाओं के खिलाफ इस तरह की दंडात्मक कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


NEET धांधली से संबंधित प्रदर्शन

CJP का यह 36 दिनों का विरोध प्रदर्शन NEET परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों के खिलाफ था। 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें भी हुई थीं। तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार द्वारा मांगें मान लिए जाने के बाद यह आंदोलन समाप्त हुआ।