सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों के प्रदर्शन पर दिए महत्वपूर्ण निर्देश
छात्रों पर लाठीचार्ज और गिरफ्तारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
पेपर लीक के विवाद पर देशभर में छात्रों द्वारा किए गए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज, गिरफ्तारी और उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर के संबंध में कई जनहित याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थीं। मंगलवार को इन याचिकाओं की सुनवाई के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि जिन छात्रों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि छात्रों के प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जा सकता है। इसके साथ ही, पहले से दर्ज FIR पर जांच जारी रखने की अनुमति देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियाँ
छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई को लेकर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान, चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ की थीं। मंगलवार को CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने इस मामले पर विचार किया। बेंच ने कहा कि पूरे देश में प्रदर्शनों के लिए एक समान प्रोटोकॉल होना चाहिए, ताकि कानून का सही तरीके से पालन किया जा सके।
कई राज्यों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
छात्रों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के साथ-साथ दिल्ली, असम, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और केरल की सरकारों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। ये राज्य ऐसे हैं जहां छात्रों को हिरासत में लिया गया या गिरफ्तार किया गया।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
- हिरासत में लिए गए सभी छात्रों को रिहा किया जाए जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
- किसी भी प्रदर्शनकारी की व्यक्तिगत जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जाए।
- प्रदर्शन से संबंधित सभी CCTV, ड्रोन, बॉडी कैमरा, वायरलेस संचार और PCR के लॉग को सुरक्षित रखा जाए।
- प्रदर्शनकारी छात्रों की व्यक्तिगत जानकारी और डिजिटल डेटा को सरकारी संस्थाओं द्वारा सुरक्षित रखा जाए और इसे सार्वजनिक न किया जाए।
- जिन छात्रों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का विवरण
इन जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान, बेंच ने सवाल उठाया कि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच क्यों नहीं की जानी चाहिए। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा, 'जिन्होंने भी ज्यादती की है, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।' वकीलों की दलीलों को सुनते हुए, बेंच ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की ज्यादतियों से जुड़े सभी आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच आवश्यक है। बेंच ने यह भी कहा कि यदि तय प्रोटोकॉल का उल्लंघन होता है, तो कानून को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।
पुलिसकर्मियों पर हमलों की जांच
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि 250 पुलिसकर्मियों पर हुए हमलों की जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि ये हमले छात्रों ने किए थे या कुछ उपद्रवी तत्वों ने। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि छात्र पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा में शामिल नहीं होंगे, लेकिन कुछ उपद्रवी इन घटनाओं में संलिप्त हैं। उन्होंने कहा कि हत्या, दुष्कर्म और एनडीपीएस मामलों में वांटेड उपद्रवी विरोध-प्रदर्शन में शामिल हुए और उन्होंने पुलिसकर्मियों के खिलाफ हिंसा की।
संविधान के तहत शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर से कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार संविधान द्वारा प्रदत्त है। उल्लेखनीय है कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आह्वान पर 20 जुलाई को दिल्ली में 'चलो संसद' मार्च निकाला गया था, जिसमें प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें हुईं। सुरक्षाकर्मियों ने संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठियों और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। ये प्रदर्शनकारी NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।