सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों पर लाठीचार्ज मामले में सुनवाई से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
नई दिल्ली। 20 जुलाई को जंतर मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और संसद मार्च के दौरान पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले छोड़ने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से मना कर दिया है। अदालत ने न केवल सुनवाई से इनकार किया, बल्कि यह भी कहा कि उसके पास ऐसे वीडियो देखने का समय नहीं है। याचिका दायर करने वाले वकील को अदालत ने यह भी बताया कि वे समय बर्बाद कर रहे हैं।
बुधवार को एक वकील ने चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच के समक्ष जनहित याचिका प्रस्तुत की थी। इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, 'हमें वीडियो देखने में कोई रुचि नहीं है। हमारे पास उन्हें देखने का समय नहीं है।' जब वकील ने छात्रों के साथ मारपीट के वीडियो देखने का अनुरोध किया, तो चीफ जस्टिस ने कहा, 'हमारा और अपना समय बर्बाद मत कीजिए।'
15 मई को एक मामले की सुनवाई के दौरान, चीफ जस्टिस ने कहा था, 'कुछ बेरोजगार युवा कॉकरोच जैसे होते हैं, जो बाद में मीडिया, सोशल मीडिया या आरटीआई एक्टिविस्ट बनकर सिस्टम पर हमला करने लगते हैं।' इसी टिप्पणी के बाद अभिजीत दीपके ने इंस्टाग्राम पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम से एक अकाउंट बनाया था। इसी पार्टी ने 20 जुलाई को संसद की ओर मार्च किया था, जिसमें हजारों प्रदर्शनकारी शामिल थे। पुलिस ने इन्हें रोकने के लिए लाठीचार्ज किया।
मंगलवार को इसी तरह का एक मामला दिल्ली हाई कोर्ट में भी पहुंचा था, जहां अदालत ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि इसे कोर्ट में न घसीटें। वहीं, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने लाठीचार्ज की जांच की मांग की है। एसोसिएशन का कहना है कि इस कार्रवाई में कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं और इसकी तुरंत, निष्पक्ष और समय पर जांच होनी चाहिए।