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सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों पर हमलों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया

सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों में डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मचारियों पर बढ़ते हमलों के प्रति सख्त रुख अपनाया है। महाराष्ट्र में एक मामले की सुनवाई के दौरान, अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे हमलों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए। यह मामला दही हांडी उत्सव के दौरान घायल एक व्यक्ति को अस्पताल से छुट्टी देने को लेकर विवाद से जुड़ा है। अदालत ने इस मामले में आगे की सुनवाई की तारीख भी निर्धारित की है। जानें इस मामले में और क्या हुआ और सुप्रीम कोर्ट ने क्या निर्देश दिए।
 

सुप्रीम कोर्ट की सख्त चेतावनी


सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों में डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मचारियों पर बढ़ते हमलों के प्रति गंभीरता दिखाई है। महाराष्ट्र में एक मामले की सुनवाई के दौरान, अदालत ने स्पष्ट किया कि डॉक्टरों के साथ मारपीट करने वाले राजनीतिक नेताओं और अन्य आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। कोर्ट ने चिकित्सा पेशेवरों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया।


डॉक्टरों पर हमलों की बढ़ती घटनाएं

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र में राजनीतिक दलों से जुड़े व्यक्तियों द्वारा डॉक्टरों पर हमलों की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में शामिल व्यक्तियों को तुरंत हिरासत में लिया जाना चाहिए और उन्हें स्वतंत्र रूप से घूमने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। यह टिप्पणी कल्याण के शास्त्रीनगर अस्पताल में डॉक्टरों पर हुए हमले से संबंधित मामले की सुनवाई के दौरान आई। इस मामले में शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे ने जमानत की कुछ शर्तों को चुनौती दी थी, लेकिन उनके वकील ने बाद में याचिका वापस ले ली।


घटना का विवरण

यह मामला दही हांडी उत्सव के दौरान घायल एक व्यक्ति को अस्पताल से छुट्टी देने को लेकर विवाद से संबंधित है। जानकारी के अनुसार, रविवार तड़के कल्याण के शास्त्रीनगर अस्पताल में घायल व्यक्ति के डिस्चार्ज को लेकर हंगामा हुआ।


पालघर पुलिस ने इस मामले में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट के सदस्यों सहित 17 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि उसने शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे की जमानत रद्द करने की मांग की है। अदालत ने इस पर नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को निर्धारित की।


अस्पताल में बढ़ते विवाद

अस्पताल में विवाद के दौरान, बीच-बचाव करने वाले कर्मचारियों के साथ भी कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया। CCTV फुटेज के अनुसार, आरोपियों में से एक ने रिसेप्शनिस्ट को थप्पड़ मारा, जबकि एक महिला कर्मचारी को धमकाने का आरोप है।


एक अस्पताल कर्मचारी की शिकायत के अनुसार, शिवसेना के जिला प्रमुख कुंदन सांखे, शहर प्रमुख राहुल घरत और अन्य लोग इमरजेंसी विभाग में पहुंचे थे। वहां घायल व्यक्ति को छुट्टी देने को लेकर डॉक्टरों के साथ बहस हुई, जो बाद में विवाद में बदल गई। पुलिस मामले में आरोपों और उपलब्ध सबूतों की जांच कर रही है।


सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अस्पतालों में डॉक्टरों और अन्य चिकित्सा कर्मचारियों पर होने वाली हिंसा को सामान्य घटना के रूप में नहीं लिया जा सकता। अदालत ने शिवसेना पार्षद रमेश सुक्रिया म्हात्रे से भी मामले को लेकर सवाल किए।


कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अस्पतालों में डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता व्यक्त की जा रही है। अदालत ने संकेत दिया कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई आवश्यक है, चाहे वे किसी राजनीतिक दल से जुड़े हों या किसी अन्य प्रभावशाली समूह का हिस्सा हों। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर की जाएगी।