सुप्रीम कोर्ट ने तीसरी भाषा नीति पर केंद्र से मांगा जवाब, जानें क्या है मामला
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
नई दिल्ली: कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीसरी भाषा को अनिवार्य बनाने के सीबीएसई के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और एनसीईआरटी से स्पष्टीकरण मांगा है। इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए, कोर्ट ने केंद्र, सीबीएसई और एनसीईआरटी को नोटिस जारी किया है और विस्तृत उत्तर प्रस्तुत करने के लिए कहा है। अगली सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह में निर्धारित की गई है।
जानकारी की मांग
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से यह भी पूछा कि नई भाषा नीति को लागू करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने विशेष रूप से शिक्षकों, पाठ्यपुस्तकों और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता के बारे में जानकारी मांगी है।
वकील की दलीलें
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया कि सीबीएसई ने हाल ही में एक परिपत्र जारी किया है, जिसमें 2026-27 सत्र से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में अभी पर्याप्त किताबें और प्रशिक्षित शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इसे संवैधानिक और संघीय मुद्दा बताते हुए कहा कि किसी छात्र पर भाषा थोपना उचित नहीं है।
तीसरी भाषा नियम का विवरण
दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा और चेन्नई के अभिभावकों और शिक्षकों सहित 19 लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में 15 मई 2026 को जारी सीबीएसई के सर्कुलर को चुनौती दी गई है, जिसमें कहा गया है कि कक्षा 9 के छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें से दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य है।
नीति का विरोध
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सीबीएसई ने पहले 9 अप्रैल 2026 को स्पष्ट किया था कि तीसरी भाषा की अनिवार्यता 2029-30 तक लागू नहीं होगी। अचानक नीति में बदलाव से छात्रों और स्कूलों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही, याचिका में यह भी कहा गया है कि यह नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के खिलाफ है, जिसमें छात्रों पर किसी भाषा को थोपने से बचने की बात कही गई थी।
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कोई अंतरिम राहत नहीं दी है, लेकिन केंद्र और संबंधित संस्थाओं से विस्तृत जवाब मांगा है। उम्मीद है कि जवाब के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।