सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार की एयर क्वालिटी प्रबंधन में लापरवाही की आलोचना की
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
गुरुवार को, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार और एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन (CAQM) की आलोचना की। अदालत ने त्योहारों के दौरान पटाखों से संबंधित नियमों को लागू करने में विफलता पर चिंता जताई। न्यायालय ने कहा कि जब तक आदेशों को सही तरीके से लागू नहीं किया जाता, तब तक निर्देशों का कोई महत्व नहीं है, और यह केवल एक मजाक बनकर रह जाते हैं।
पटाखों के उपयोग पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले शामिल थे, ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों के उपयोग से संबंधित मामलों की सुनवाई की। पीठ ने यह स्पष्ट किया कि वह पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के पक्ष में नहीं है।
केंद्र सरकार की जानकारी
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि दिल्ली सरकार और CAQM ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कुछ कदम उठाए हैं। पीठ ने ऐश्वर्या भाटी से कहा, 'हम हर साल आदेश जारी करते हैं, लेकिन ये केवल सैद्धांतिक चर्चा बनकर रह जाते हैं। आपको भी कुछ ठोस करना होगा।'
दिल्ली सरकार की योजना
ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि दिल्ली सरकार ने इस वर्ष एक व्यापक योजना बनाई है, जिसमें नवंबर से कई उपाय लागू होंगे। इनमें पुराने वाहनों पर पाबंदियां, निर्माण गतिविधियों पर रोक और कार्यालयों के समय में बदलाव शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पटाखों में बेरियम के उपयोग पर विचार-विमर्श चल रहा है और इसके लिए तीन सप्ताह का समय मांगा गया है।
अदालत का सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से पूछा, 'आपने वास्तव में क्या किया है? जब तक आप हमें यह नहीं बता सकते कि आपने क्या किया है, आदेश पारित करने का क्या अर्थ है? यह मजाक बन जाता है।'
जन जागरूकता का महत्व
पीठ ने कहा कि अधिकारियों को इस मुद्दे पर गंभीरता से कार्य करना चाहिए। पटाखों के उपयोग पर, अदालत ने सुझाव दिया कि जन जागरूकता फैलाने के लिए खिलाड़ियों और प्रमुख हस्तियों की मदद ली जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा, 'आपको इस पर नियंत्रण करना होगा। हम हर साल संतुलन बनाने का प्रयास करते हैं, लेकिन सभी का सहयोग नहीं मिलने पर यह संभव नहीं है। हम जनता की भावनाओं को समझते हैं, लेकिन हमें सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर न करें।'