सुप्रीम कोर्ट ने नीट पीजी कटऑफ में कमी पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की दलीलों को नजरअंदाज करते हुए नीट पीजी परीक्षा में कटऑफ में भारी कमी के प्रभाव की जांच करने का निर्णय लिया है। केंद्र ने दावा किया था कि कटऑफ में कमी से मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।
जस्टिस नरसिम्हा का बयान
सोमवार को जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि केंद्र का यह तर्क कि नीट पीजी एंट्री लेवल एमबीबीएस परीक्षा नहीं है, सही है। लेकिन, कटऑफ में कमी के प्रभाव पर विचार करना आवश्यक है। नीट पीजी परीक्षा के परिणामों के बाद कई सीटें खाली रह गई थीं, जिसके चलते कटऑफ को माइनस 40 अंक तक घटा दिया गया।
शिक्षा की गुणवत्ता पर चिंता
जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट सबसे बड़ी चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि कटऑफ में इतनी कमी, जो लगभग जीरो के बराबर है, पर विचार करना होगा। यह ध्यान देने योग्य है कि जो लोग आवेदन कर रहे हैं, वे पहले से ही डॉक्टर हैं।
केंद्र का बचाव
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में अपने बचाव में कहा कि नीट पीजी में प्राप्त अंक किसी प्रतियोगी की योग्यता का प्रमाण नहीं हैं। सरकार ने यह भी कहा कि एमबीबीएस में दाखिले के समय ही किसी प्रतियोगी की वास्तविक योग्यता का निर्धारण होता है। केंद्र ने कटऑफ में कमी के निर्णय को सही ठहराते हुए कहा कि इससे मरीजों की सुरक्षा पर कोई खतरा नहीं है।